निर्वासित तिब्बती सरकार के राष्ट्रपति लोबसांग सांगेय
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तिब्बत में निर्वासित सरकार के राष्ट्रपति लोबसांग सांगेय ने रविवार को दशाश्वमेध घाट पहुंचकर गंगा आरती देखी। इस दौरान उन्होंने पहले विधि-विधान मां गंगा का पूजन और दुग्धाभिषेक और मां गंगा आरती भी की।
सरकार के धर्म संस्कृति मंत्री करमा गोलेक यूतोप और संसद के स्पीकर लोपोन सोनम टेनफिल सहित करीब 200 प्रतिनिधियों के साथ आए सांगेय ने मां गंगा से वैश्विक शांति की कामना भी की।
केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान सारनाथ में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लेने आए सांगेय राजघाट से बजड़े पर बैठकर शाम करीब 6 बजे आरती स्थल के सामने पहुंचे। यहां से उन्हें सम्मान के साथ आरती स्थल के पास बने मंच पर ले जाया गया।
इस दौरान आचार्य रणधीर की अगुवाई में गंगा पूजन कराया गया। करीब एक घंटे तक चले कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मोबाइल में गंगा आरती की तस्वीर के साथ ही खुद की सेल्फी भी ली। यहीं नहीं दोनों हाथ उठाकर मां गंगा के जयकारे भी लगाए।
आरती समाप्ति के बाद गंगा सेवा निधि की ओर से श्याम लाल सिंह, हनुमान यादव, सुरजीत सिंह, आशीष तिवारी, इंदुशेखर शर्मा आदि ने सांगेय को उनकी तस्वीर लगी स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और रुद्राक्ष माला भेंटकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा अन्य प्रतिनिधि भी सम्मानित किए गए।
पीएम मोदी कर रहे विकास, बनारस आकर बहुत खुश हूं
गंगा पूजन करते लोबसांग सांगेय
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लोबसांग सांगेय ने गंगा आरती के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नया साल शुरू होने वाला है, ऐसे में गंगा आरती करने का सौभाग्य पाकर बहुत खुश हूं। मां गंगा से यही कामना है कि भारत और तिब्बत इसी तरह विकास के पथ पर आगे बढ़ते रहे और स्वतंत्रता कायम रहे।
भारत और तिब्बती संस्कृति, भाषा बिल्कुल समान है। तिब्बत की आजादी को लेकर जो लड़ाई चल रही है, उसमें नए साल में यही कामना है कि आंदोलन को सफलता मिले और मां गंगा मेरी यह मुराद पूरी करें। कहा कि पीएम के संसदीय क्षेत्र में आकर बहुत खुश हूं।
सांगेय ने कहा कि मोदी के हाथों कमान के बाद पूरे देश का विकास हो रहा है। इसकी तस्वीर उनके संसदीय क्षेत्र में देखने को मिली। लंबे समय बाद बनारस आने के बाद एयरपोर्ट से शहर से बाहर आया तो सड़क बेहतर दिखी।
डोकलाम विवाद पर सवाल के जवाब में कहा था कि इस तरह की गतिविधियों से अलर्ट रहने की जरूरत है। पाकिस्तान और चीन के रिश्ते पर कहा कि चीन को भी भारत जैसा स्वतंत्रता मिले, मानवाधिकार हो, तब उन्हें भी पूरे विश्व में आदर सम्मान मिलेगा।