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ठुमरी गायन प्रतियोगिता: ईशान को सिद्धेश्वरी देवी और जयंतिका को मिला महादेव प्रसाद मिश्र सम्मान

Sat, 05 Apr 2025 05:53 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

दो दिवसीय प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों के कुल 70 प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया था। जीते हुए प्रतिभागियों कों पुरस्कृत करने के साथ ही उन्हें प्रोत्साहित किया गया।
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कार्यक्रम के दाैरान जीते हुए प्रतिभागी और अतिथिगण। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ठुमरी की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ईशान घोष को ठुमरी साम्राज्ञी सिद्धेश्वरी देवी सम्मान और जयंतिका डे को पं. महादेव प्रसाद मिश्र सम्मान दिया गया। ईशान ने वरिष्ठ वर्ग में और जयंतिका ने कनिष्ठ वर्ग में प्रथम स्थान हासिल किया। 

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दो दिवसीय प्रतियोगिता में आठ राज्यों के 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। शुक्रवार को रथयात्रा स्थित कन्हैया लाल स्मृति भवन में राष्ट्रीय प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

काशी कला कस्तूरी की ओर से आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता के वरिष्ठ वर्ग में ईशान घोष को प्रथम पुरस्कार स्वरूप 11000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार सुनीति पाठक को 6000 हजार रुपये, तृतीय पुरस्कार अलंकृता राय को 3000 रुपये और सांत्वना पुरस्कार समृद्धि गुप्ता को 1100 रुपये दिए गए। 

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कनिष्ठ वर्ग में जयंतिका डे को प्रथम पुरस्कार स्वरूप 51 सौ रुपये, द्वितीय पुरस्कार श्रेया सोनकर को 3000, तृतीय पुरस्कार रामा सिंह को 2500 रुपये और सांत्वना पुरस्कार सायोन मुखर्जी को 1100 रुपये दिए गए। 

मुख्य अतिथि पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव ने कहा कि नई पीढ़ी के कलाकारों में ठुमरी गायन के प्रति लगाव देखकर बहुत संतोष हो रहा है। देश के आठ राज्यों से करीब 70 प्रतिभागियों का प्रतियोगिता में भाग लेना यह दर्शाता है कि इस विधा के प्रति युवाओं में विशेष रूप से दिलचस्पी है। इन प्रतिभाओं के उन्नयन के लिए इन्हें निरंतर मंच प्रदान करते रहना संगीत समाज की जिम्मेदारी है।
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लोकविधा में गायन करने वाले कलाकारों की महसूस हो रही कमी
प्रो. एचएस शुक्ल ने कहा कि उपशास्त्रीय के साथ ही लोक गायन की विधाओं को भी प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। हाल के दिनों में लोक विधाओं में गायन करने वाले कलाकारों की बड़ी कमी महसूस की जा रही है। लोक गायन की विधाओं में भी इस प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना चाहिए। 

विशिष्ट अतिथि प्रख्यात ज्योतिषाचार्य प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय ने कहा कि संगीत एक ऐसा माध्यम है जो हमें कठिन से कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में सहायक होता है। विशिष्ट अतिथि बनारस बीड्स के अशोक कुमार गुप्त ने कहा कि पहले के जमाने में संगीत के कलाकारों को राज आश्रय मिला करता था। 

आज का दौर बहुत अलग है। संस्था की तरफ से विदुषी सुचरिता गुप्ता ने ठुमरी प्रतियोगिता करने उद्देश्य पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय ठुमरी गायन प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाने वाली प्रो. शारदा वेलंकर, डॉ.कमला शंकर एवं पं. भोलानाथ मिश्र को भी संस्था की ओर से सम्मानित किया गया। स्वागत डॉ. शबनम खातून ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभास झा ने किया।
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