कनिष्ठ वर्ग में जयंतिका डे को प्रथम पुरस्कार स्वरूप 51 सौ रुपये, द्वितीय पुरस्कार श्रेया सोनकर को 3000, तृतीय पुरस्कार रामा सिंह को 2500 रुपये और सांत्वना पुरस्कार सायोन मुखर्जी को 1100 रुपये दिए गए।
मुख्य अतिथि पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव ने कहा कि नई पीढ़ी के कलाकारों में ठुमरी गायन के प्रति लगाव देखकर बहुत संतोष हो रहा है। देश के आठ राज्यों से करीब 70 प्रतिभागियों का प्रतियोगिता में भाग लेना यह दर्शाता है कि इस विधा के प्रति युवाओं में विशेष रूप से दिलचस्पी है। इन प्रतिभाओं के उन्नयन के लिए इन्हें निरंतर मंच प्रदान करते रहना संगीत समाज की जिम्मेदारी है।
लोकविधा में गायन करने वाले कलाकारों की महसूस हो रही कमी
प्रो. एचएस शुक्ल ने कहा कि उपशास्त्रीय के साथ ही लोक गायन की विधाओं को भी प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। हाल के दिनों में लोक विधाओं में गायन करने वाले कलाकारों की बड़ी कमी महसूस की जा रही है। लोक गायन की विधाओं में भी इस प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि प्रख्यात ज्योतिषाचार्य प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय ने कहा कि संगीत एक ऐसा माध्यम है जो हमें कठिन से कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में सहायक होता है। विशिष्ट अतिथि बनारस बीड्स के अशोक कुमार गुप्त ने कहा कि पहले के जमाने में संगीत के कलाकारों को राज आश्रय मिला करता था।
आज का दौर बहुत अलग है। संस्था की तरफ से विदुषी सुचरिता गुप्ता ने ठुमरी प्रतियोगिता करने उद्देश्य पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय ठुमरी गायन प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाने वाली प्रो. शारदा वेलंकर, डॉ.कमला शंकर एवं पं. भोलानाथ मिश्र को भी संस्था की ओर से सम्मानित किया गया। स्वागत डॉ. शबनम खातून ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभास झा ने किया।