एनजीटी द्वारा नामित सीईएमडीई की टीम एक जुलाई को करेगी निरीक्षण
तैयार की गईं हैं तीन परियोजनाएं, सिंचाई विभाग कराएगा कार्य
पार्क बनाने, पौधरोपण के अलावा होगी सिल्ट की सफाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। पौराणिक नदी असि और वरुणा का भी पुनरुद्धार होगा। सफाई के साथ ही इनके तटों पर हरियाली होगी और पार्क भी बनेंगे। गंगा की तरह यह भी पर्यटन के केंद्र बनेंगे। इसके लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशन में सेंटर फॉर इनवायरमेंट मैंनेजमेंट डीग्रेड ईको सिस्टम (सीईएमडीई) ने कार्ययोजना तैयार की है।
लुप्त होने के कगार पर खड़ी असि और गंदगी का पर्याय बनी वरुणा नदी की पीड़ा को एनजीटी के निर्देशन में दूर करने की कवायद शुरू हो गई है। एनजीटी ने सीईएमडीई को इन दोनों नदियों के पुनरुद्धार और सुंदरीकरण करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। सीईएमडीई की पहली टीम मई में यहां आई थी। अब दूसरी टीम एक जुलाई को आ रही है, जो निरीक्षण कर बाकी कार्य को इस कार्ययोजना में शामिल करेगी।
जीवों का होगा संरक्षण, रोपे जाएंगे औषधीय पौधे
कंस्ट्रेक्टेड वेटलैंड सिस्टम (सीडब्ल्यूएस) के तहत नदी के भीतर पत्थर व जाली लगाने के साथ ही बायो डायवर्सिटी पार्क विकसित किया जाएगा। जीव-जंतुओं का संरक्षण होगा और पार्क में औषधीय पौधे रोपे जाएंगे। दोनों नदियों की सिल्ट की सफाई होगी। पांच ब्लाॅकों के 39 गांवों से होकर गुजरने वाली वरुणा नदी के 20 किमी तक तथा असि नदी के किनारे आठ किमी तक कार्य होगा। वन विभाग, जलनिगम, नगर निगम, वीडीए, सिंचाई विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण विभाग आदि कार्य करवाएंगे।
वर्जन
सीईएमडीई की टीम के निरीक्षण के बाद परियोजनाओं के लिए बजट का प्रस्ताव राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजा जाएगा। बजट मिलने के बाद कार्य शुरू हो जाएगा। - राजेश यादव, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग