गंगा में बढ़ते प्रदूषण के बीच प्लास्टिक प्रदूषण की रोकथाम, निगरानी और व्यवस्थागत जिम्मेदारियों के लिए केंद्र सरकार के जलशक्ति मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर थीमेटिक ग्रुप का गठन किया है। आठ सदस्यीय विषयगत विशेषज्ञों का यह समूह गंगा बेसिन में प्लास्टिक प्रदूषण के हॉटस्पॉट चिह्नित करने से लेकर नदी प्रणाली में प्लास्टिक कचरे के लीकेज और इस मसले पर तैयार होने वाले प्रोजेक्ट्स और रिसर्च तक पर निगरानी रखेगा। साथ ही सरकार को तकनीकी सहयोग करेगा।
इस समिति में बीएचयू के पर्यावरणविद डॉ. कृपा राम भी हैं। वह राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की रिवर मैनेजमेंट सेल के अंतर्गत इस ग्रुप में गंगा में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। उनके अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर, श्रीनगर के अर्थ साइंस डिपार्टमेंट के प्रो. गुलाम जिलानी को ग्रुप के कन्वेनर होंगे।
इनके अलावा आईसीएआर कोलकाता के डायरेक्टर डॉ. बीके दास, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी गोवा के केमिकल ओशनोग्राफी डिवीजन के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. महुआ साहा, आईआईटी रुड़की के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. अभयानंद सिंह मौर्या, भारतीय नदी परिषद के अध्यक्ष रमन कांत एवं एनएमसीजी की सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर रूबी राजू को सदस्य और एनएमसीजी की रिवर बेसिन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट डॉ. सहजप्रीत कौर को थीमेटिक ग्रुप का सदस्य सचिव बनाया गया है।