इससे पहले उसके खिलाफ 2000 में मारपीट, धमकाने सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। 2007 में डॉ. शिल्पी राजपूत के पति डॉ. डीपी सिंह की हत्या के बाद बबलू की जरायम जगत में पैठ बढ़ती चली गई और वह पूर्वांचल के एक चर्चित माफिया के धुर विरोधी बदमाश के करीबी और शरणदाता के तौर पर पहचाना जाने लगा।
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2018 में बागपत जेल में मारे गए मुन्ना बजरंगी के लखनऊ निवासी करीबी से भी बबलू की निकटता बीते एक साल से बढ़ती ही चली जा रही थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बबलू की जान या तो मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद पूर्वांचल के जरायम जगत में बने नए समीकरणों की भेंट चढ़ी है या फिर इसकी आड़ में पुरानी रंजिश में किसी ने प्रोफेशनल शूटर से उसकी हत्या करा कर अपना बदला लिया है।
जेल में बंद कुख्यात और पूर्व सांसद की भूमिका की जांच
तफ्तीश में यह बात भी सामने आई कि डॉ. डीपी सिंह हत्याकांड में शामिल रहा एक कुख्यात शूटर इन दिनों बांदा जेल में बंद है। वह बदमाश एक अरसे से पुराने संबंधों का हवाला देकर बबलू से जेल और गुर्गों के खर्चे के लिए रुपये मांग रहा था।
इसे लेकर उसमें और बबलू के बीच कई बार नोकझोंक भी हो चुकी थी। उसके गिरोह के कुछ शूटर हाल ही में गाजीपुर सहित अन्य जेलों से जमानत पर बाहर आए हैं। इसकी पुष्टि होने पर पुलिस ने बांदा जेल में निरुद्ध बदमाश की भूमिका की तफ्तीश भी शुरू कर दी है। इसके अलावा पुलिस बबलू की हत्या में पूर्वांचल के आपराधिक पृष्ठभूमि वाले एक पूर्व सांसद की भूमिका की भी जांच भी कर रही है।
बबलू की मोबाइल की कॉल डिटेल से मिले अहम सुराग
बबलू के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल से पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। पुलिस के अनुसार, वह रोजाना जरायम जगत के कई चर्चित लोगों के संपर्क में रहता था। इसके अलावा वरुणा पार के कुछ डॉक्टरों और बिल्डरों से भी उसकी नियमित बातचीत होती थी। पुलिस के अनुसार, कॉल डिटेल से मिले तथ्य आगामी दिनों में मुकदमे की विवेचना में काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे।