इसके बाद पुलिस ने महिला से पूछताछ की। फिर उसे लेकर पुलिस घटनास्थल पर गई। वहां हाईवे के किनारे शिवा का खून से लथपथ शव मिला। पुलिस ने महिला की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया।
बक्शा थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने बताया कि पति की तहरीर पर महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण त्रिभुवन सिंह ने बताया कि आरोपी आरती को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। आरती के अनुसार, उसका पति से बराबर झगड़ा होता है। इससे गुस्से में आकर उसने बेटे शिवा की चाकू से हत्या कर दी।
अपने ही हाथों से इकलौते डेढ़ साल के बेटे की हत्या करने वाली मां को जब ये अहसास हुआ कि उससे हाथों से क्या हो गया है तो वह अपने गुनाह कबूल करने के लिए पैदल ही चार किमी दूर थाने पर आ गई। अंदर जाने की हिम्मत नहीं हुई मगर, लोगों के पूछते ही अपने किए गुनाह कबूल कर लिए । प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ लोगों ने उसे परेशान होकर इधर-उधर टहलते देखा तो कारण पूछा, जिसके बाद वह अपने किए की जानकारी उन्हें सुना दी, इसकी खबर सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई।
फिर महिला को हिरासत में लेकर घटना स्थल पर गए तो शव और हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक आरती बार-बार यह कह रही थी कि अरे मैंने यह क्या कर दिया। वहीं, थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी महिला पूछताछ के दौरान अपने किए पर बार-बार पछतावा कर रही है। हालांकि उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
कहते हैं, गुस्सा हमेशा नुकसान पहुंचाता है। कुछ ऐसा ही हुआ बसारतपुर निवासी आरती के साथ, जो गुस्से में आकर अपने ही बेटे की बेरहमी से शनिवार को हत्या कर दी। जबकि वहीं, अपने बेटे के इलाज के लिए परेशान रहती थी और परिवार पर भी इसी बात को लेकर आरोप लगा रही है। आरती का कहना था कि उसके बेटे शिवा की तबियत करीब डेढ़ माह से खराब चल रही है। जबकि वह भी अस्वस्थ है।
बक्शा थाने में आरती अपने पति वंशराज पर आरोप लगा रही थी। वह कह रही थी उसकी और उसके बेटे का इलाज ठीक से नहीं करा रहा था। इसे लेकर वह तनाव में रहती थी। वहीं, उसका पति उसके चरित्र पर लांछन लगाता था। मायके में भी शिकायत करने पर वहां के लोग कहते थे कि जो करना है पति और तुम्हारे ससुराल के ही लोगों को करना है, तुम वहीं, रहो। वह तनाव में रहती थी और गुस्से में आकर यह कदम उठा ली।
आरती की बेटी और उसके पति की पहली पत्नी से हुई दो बेटियां रक्षाबंधन की तैयारी में जुटी थी। लेकिन, आरती के इस गलत कदम ने उसके इस तैयारी पर पानी फेर दिया। वहीं, घटना के बाद परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बच्चे की हत्या मनोग्रस्तता में लिया गया निर्णय
जौनपुर। मां द्वारा अपने ही बच्चे की हत्या किया जाना मनोग्रस्तता( मानसिक विकृति) में लिया गया निर्णय है। पूविवि. की मनोचिकित्सक डा. जाह्नवी श्रीवास्तव का कहना है कि इस तरह का मानसिक विकृति ऐसी महिलाओं में आती है, जो शादी से पहले एबार्सन (गर्भपात) करा चुकी होती है। उनके मन में बच्चे की हत्या की बात हमेशा चलती रहती है और उसी दबाव में आकर वह एक दिन अपने बच्चे की हत्या खुद कर डालती है।
इस तरह की सोच जब मन में आती है तो उसे मनोग्रस्तता कहते हैं, और घटना को अंजाम दे देते हैं तो उसे बाध्यता कहते हैं। दोनों बातें एक साथ मिलकर मनोग्रस्तता बाध्यता कहलाती हैं। इस तरह की घटनाएं मनुष्य में मानसिक विकृति के कारण देखने को मिलती हैं। परिवार से सहयोग नहीं मिलने पर भी इस तरह घटनाएं हो जाती है।