यहां पर मौलाना फिरोज अली ने नूरानी तकरीर की। यहां से जुलूस काली महाल, पितरकूंडा होते हुए दरगाहे फातमान पहुंचा। काली महल में लोगों ने केक पर फातेहा कर हजरत अली का नारा लगाया। दरगाहे फातमान पर मौला अली के रौजे पर हजारों की संख्या में भी लोगों ने देश की सलामती के लिए दुआएं भी मांगी।
इसके बाद सेमिनार में संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी, गुरुद्वारा से भाई धर्मवीर, मसीही समाज के फादर फिलिप्स सहित अन्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए। शायरों ने भी कलाम पेश किया। कार्यक्रम में शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित भी किया गया।
हाजी सैयद फरमान हैदर ने बताया कि मौला अली ने हमेशा मानवाधिकार के लिए लोगों को इंसाफ के लिए अपनी जिंदगी समर्पित की। 1467 साल पहले हजरत अली का जन्म काबा में हुआ था। इस दौरान मौलाना जमीर हैदर, मोहसिन, मौलाना अकील, मुर्तुजा शम्सी, फिरोज हुसैन, जहीर हैदर, जौहर हुसैन आदि मौजूद रहे।