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जनता के पक्ष में खड़े होने वाले कवि थे धूमिल

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जनकवि सुदामा पांडेय धूमिल के स्मृति दिवस पर प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, जनसंस्कृति मंच, इप्टा तथा धूमिल शोध संस्थान के तत्वावधान में वेबिनार का आयोजन हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए आलोचक प्रो. चौथी राम यादव ने कहा कि धूमिल जनता के पक्ष में खड़े होने वाले कवि थे। धूमिल अपनी लोकप्रियता के कारण युवा वर्ग के आइकॉन बन गए थे।
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कवि डॉ. बसंत त्रिपाठी ने कहा कि धूमिल को हमें याद रखना इसलिए जरूरी है कि उनकी चिंताएं हमारे समय की भी चिंताएं हैं। धूमिल के पुत्र रत्न शंकर पांडे के संपादन में तीन खंडों में धूमिल समग्र आ जाने के बाद अब उन्हें एक बदली हुई दृष्टि से देखना जरूरी हो गया है। विचारक प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि धूमिल गंभीर अर्थों में दूसरे प्रजातंत्र की तलाश के कवि हैं। आज हम जिस जेनुइन डेमोक्रेसी के लिए तरस रहे हैं धूमिल उसी के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस दौरान रत्न शंकर पांडेय, डॉ. गोरखनाथ, डॉ. वंदना चौबे, नवोदिता, शिवकुमार पराग, डॉ. एम पी सिंह, डॉ. संजय श्रीवास्तव आदि ने विचार व्यक्त किए।
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