फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नौ दिन चले अढ़ाई कोस

Fri, 02 Sep 2016 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
विज्ञापन
काशी के कायाकल्प के लिए केंद्र और राज्य सरकार में होड़ के बाद भी न तो शहर की सूरत बदल रही है और न ही बुनियादी सुविधाओं में सुधार हो पा रहा है। दोनों सरकारों ने यहां दर्जन भर से अधिक विकास योजनाएं चला रही हैं। करोड़ों रुपये की इन योजनाओं पर दो साल से काम चल रहा है मगर निर्माण कार्यों की रफ्तार कछुआ चाल जैसी है। यही वजह है कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र ने प्रदेश के मुख्य सचिव दीपक सिंघल को वाराणसी में संचालित योजनाओं की बदहाली की याद दिलाने के साथ ही क्रियान्वयन पर ध्यान देने को कहा है।
विज्ञापन



दो साल में केंद्र सरकार की योजनाओं की प्रगति 10 से 25 प्रतिशत ही रही है। तमाम दावों, निर्देशों और दौरों के बावजूद विकास कार्य जमीन पर नहीं उतर पाए हैं। आईपीडीएस के तहत बिजली के तारों को भूमिगत किया जा रहा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने अप्रैल में घोषणा की थी कि एक साल में काम पूरा हो जाएगा लेकिन जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उससे नहीं लगता कि अगले सात महीने में काम पूरा हो पाएगा।


ट्रेड फेसेलिटी सेंटर, हृदय, अमृत, प्रसाद, स्वदेश आदि योजनाओं का हाल भी बेहाल है। इसी तरह शहर को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए रिंग रोड की शुरूआत 2003 से हुई लेकिन अब तक रिंग रोड नहीं बन सका। इसके लिए जमीन का अधिग्रहण तक नहीं हो सका है। जानकारों की मानें तो केंद्रीय योजनाओं का सारा काम केंद्र की एजेंसियां कर रही हैं। इन पर राज्य सरकार या स्थानीय प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है।
विज्ञापन



योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी तब हो रही है, जब यहां चल रहे विकास कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है। केंद्र सरकार का कोई न कोई मंत्री और विभागीय अधिकारी हर महीने हकीकत जानने के लिए आता है। विभागीय अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं के जिम्मेदारों को ऐसे फटकार जाता है, जैसे कई नप जाएंगे लेकिन उनके जाते ही फिर से सब कुछ पुराने ढर्रे पर आ जाता है। योजनाओं के रफ्तार न पकड़ पाने को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। कई प्रोजेक्ट अब तक फाइलों से बाहर नहीं निकल पाए हैं।


पीएम की महत्वाकांक्षी योजना जलपरिवहन के तहत जलपोत को कछुओं ने रोक रखा है। रामनगर में बन रहे टर्मिनल से जलपोत को रवाना दो माह पहले किया जाना था लेकिन कछुआ सेंक्चुअरी को लेकर प्रदेश सरकार की अडंगेबाजी के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी औपचारिक शुरूआत कर दी है। गंगा नदी में जल परिवहन अभी वाराणसी के लोगों के लिए अभी मूर्त रूप नहीं ले पाया है।


पीएम नरेंद्र मोदी ने अस्सी घाट पर फावड़ा चलाकर देश भर में स्वच्छता का संदेश दिया था। सरकार की प्रतिनिधि बनकर यहां कई इंटरनेशनल और नेशनल कंपनियां आई। सीएसआर के तहत सफाई अभियान चला। बावजूद इसके शहर आज भी वैसा ही है, जैसा पहले था। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के कारण जगह-जगह फैली गंदगी से इस अभियान की खुलेआम खिल्ली उड़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें