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Varanasi: गंगा बेसिन में लागू होगा गंगा मित्रों का मॉडल, पांच बिंदुओं पर है फोकस, जानिए क्या है गंगा बेसिन ?

Tue, 06 Dec 2022 06:00 PM IST
किरन रौतेला आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी

सार

नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत अविरल, निर्मल, अर्थ, आध्यात्मिक एवं पारिस्थितिक गंगा से जन-जन को जोड़ने की कवायद का 10 महीने में ही सकारात्मक असर नजर आ रहा है। महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र बीएचयू ने इस मॉडल को पूरे गंगा बेसिन में लागू करने का प्रस्ताव भेज दिया है। 
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वाराणसी का एक घाट। - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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विस्तार
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गंगा की अविरलता को धार देने के लिए गंगा मित्रों का मॉडल पूरे गंगा बेसिन में लागू किया जाएगा। प्रयागराज से बलिया तक 315 किलोमीटर लंबे गंगा क्षेत्र में गंगा मित्र जनता को गंगा के सरोकारों से जोड़ रहे हैं। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत अविरल, निर्मल, अर्थ, आध्यात्मिक एवं पारिस्थितिक गंगा से जन-जन को जोड़ने की कवायद का 10 महीने में ही सकारात्मक असर नजर आ रहा है। महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र बीएचयू ने इस मॉडल को पूरे गंगा बेसिन में लागू करने का प्रस्ताव भेज दिया है। 

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मार्च से गंगा संरक्षण अभियान की शुरुआत हुई थी। 700 गंगा मित्र अभियान से जुड़े हैं। 90 लाख की लागत से प्रयागराज से बलिया के बीच 21 किलोमीटर के अंतराल पर गंगा जागरूकता शोध केंद्र स्थापित किए गए हैं। गंगा मित्रों ने 650 से अधिक गंगा ग्राम एवं सौ गंगा वार्ड का चयन कर 15 हजार जल संरक्षण समिति एवं 15 हजार जल संरक्षक सदस्य बनाए हैं। 
केंद्र के चेयरमैन व पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि अभियान से आम आदमी जुड़ रहे हैं। गंगा किनारे रहने वालों की सोच व कार्यशैली में गंगा मित्रों के प्रयास से काफी बदलाव आया है। इस प्रोजेक्ट को नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को भेजा गया है।  इसे गंगा बेसिन के 2525 किलोमीटर के दायरे में लागू करने की योजना है। दूसरी अन्य नदियों के संरक्षण के लिए भी योजना को मूर्त रूप दिया जा सकता है। 

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वाराणसी के गंगा घाट पर नावें - फोटो : अमर उजाला
पांच बिंदुओं पर है फोकस
स्वच्छ गंगा : स्वच्छ गंगा अभियान को गंगा मित्र धार दे रहे हैं। गंगा स्वच्छता के लिए आम लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
अविरल गंगा : अविरल गंगा के लिए गंगा मित्र लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
आध्यात्मिक गंगा : 75 गंगा चौपालों से 4500 महिलाओं और 150 स्कूलों के 10500 बच्चों में संस्कार डालकर नमामि गंगे से जोड़ा गया है।
अर्थ गंगा : 75 गंगा ग्रामों के किसानों को गंगाजल के नाम कंजपटिव उपभोग, वर्मी कंपोस्टिंग, ऑर्गेनिक फॉर्मिंग, सब्जियों एवं फलों की गंगा ब्रांडिंग तथा नवीन सिंचाई की पद्धति की तकनीक की जानकारी देकर उनके आय में बढ़ोत्तरी कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
पारिस्थतिक विकास : 150 स्कूल, नदियों, तालाब के किनारे, पार्कों एवं मंदिरों के आसपास पौधरोपण एवं जलीय जीवों के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इको स्किल्ड तकनीकी के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।

दस महीने में हुआ बदलाव
गर्मी में तालाबों की सफाई हुई थी और बरसात में भर गए थे
कृषि का पैटर्न बदल रहे हैं गंगा तट के किसान
गांव-गांव में जल संरक्षण समितियां हैं सक्रिय
जनता का जुड़ाव बढ़ा है गंगा के प्रति
कम पानी में फसल उगाने की तकनीक सीखी
जल संरक्षण के प्रति बढ़ी जागरूकता
वर्षा जल संचयन के लिए जागरूक हुए लोग
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वाराणसी अस्सी घाट - फोटो : self
ये है गंगा बेसिन 
गंगा गोमुख से निकलती है, जो पांच राज्यों से होकर बंगाल की खाड़ी तक जाती है। नदी का पानी जिस क्षेत्र से होकर गुजरता है, उसे  ही बेसिन कहते हैं। गंगा का बेसिन उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में है।
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