भारतीय संस्कृति और सभ्यता में शुरुआत से ही शिक्षा ग्रहण करने के लिए गुरुकुल की परंपरा रही है। वैदिक शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिलाधिकारी के साथ बैठक में बच्चों को संस्कृत के साथ वेद और पुराणों की शिक्षा देने का प्रस्ताव रखा था। जिसे जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की मंजूरी मिल गई है। अब जल्द ही बच्चे नए शैक्षिक सत्र से वेदों की शिक्षा लेंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय, स्थानीय और क्षेत्रीय भाषा के माध्यम से समृद्ध भारतीय संस्कृति, धर्म, कला को बढ़ावा देना है। इसी के तहत बच्चों को वेद व पुराण की शिक्षा देने की पहल की जा रही है। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के बच्चों की जड़ मजबूत करने के लिए कक्षा एक से ही संस्कृत विषय की पढ़ाई कराई जाएगी। बच्चों को संस्कृत के शब्दबोध के साथ विषय से जुड़ा शुरुआती ज्ञान दिया जाएगा। विभाग के शिक्षकों को ही प्रशिक्षित किया जाएगा, जो बच्चों को सप्ताह मेें एक दिन इसका ज्ञान देंगे।
गीता प्रेस से पुस्तक खरीदेगा विभाग
गीता प्रेस की पहचान धार्मिक पुस्तकों को सस्ते दर पर आम जन तक पहुंचाने की है। बेसिक शिक्षा विभाग गीता प्रेस से पुस्तकें खरीदेगा। जिसके वितरण की शुरुआत जिलाधिकारी के हाथों कराई जाएगी।
कोट
नई शिक्षा नीति में छात्रों को पुराने ज्ञान से अवगत कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिसमें संस्कृत व वैदिक गणित के साथ वेद और पुराणों का भी ज्ञान भी दिया जाएगा।
- राकेश सिंह, बीएसए