चार दिवसीय सूर्य उपासना और आरोग्य सौभाग्य व सर्व सुख प्रदाता छठ व्रत आठ नवंबर से 11 नवंबर तक मनाया जाएगा। अस्ताचलगामी सूर्य देव को प्रथम अर्घ्य 10 नवंबर को और उदीयमान सूर्य देव को अर्घ्य 11 नवंबर को दिया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार इस बार चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व आठ नवंबर सोमवार से प्रारंभ होकर 11 नवंबर गुरुवार तक चलेगा। प्रथम संयम आठ नवंबर सोमवार चतुर्थी तिथि के दिन सात्विक भोजन जिसमें कद्दू और लौकी की सब्जी, चने की दाल तथा हाथ की चक्की से पीटते हुए गेहूं के आटे की पूड़ियां ग्रहण की जाती हैं। इसे नहाय खाए के नाम से जाना जाता है। अगले दिन नौ नवंबर मंगलवार पंचमी तिथि को सायं काल स्नान ध्यान के पश्चात प्रसाद ग्रहण करते हैं जो कि धातु या मिट्टी के नवीन बर्तनों में बनाया जाता है। प्रसाद के तौर पर चावल से बनी गुड़ की खीर ग्रहण किया जाता है, जिसे अन्य भक्तों में भी वितरित करते हैं इसे खरना के नाम से भी जाना जाता है।
इसके इसके बाद व्रत रखकर 10 नवंबर बुधवार षष्ठी तिथि के दिन सायं काल अस्ताचल सूर्य देव को पूर्ण श्रद्धा भाव से अर्घ्य देकर उनकी पूजा की जाती है। पूजा के अंतर्गत भगवान सूर्य देव को एक बड़े सूप की डलिया में पूजन सामग्री सजाकर साथ ही विविध प्रकार के ऋतु फल भरकर, पकवान जिनमें शुद्ध देसी घी का गेहूं के आटे तथा गुड़ से बना हुआ ठोकवा प्रमुख होता है भगवान सूर्य देव को यह अर्पित किया जाता है।
पर्व का पुण्यकाल
कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सात नवंबर रविवार को शाम 4:23 से आठ नवंबर सोमवार को दिन में 1:17 तक, आठ नवंबर सोमवार को व्रत का प्रथम नियम संयम।
कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि आठ नवंबर सोमवार को दिन में 1:17 से नौ नवंबर मंगलवार को दिन में 10:36 तक नौ नवंबर मंगलवार को द्वितीय संयम एक समय खरना।
कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि नौ नवंबर मंगलवार को दिन में 10:36 से 10 नवंबर बुधवार को प्रात: 8:26 तक
कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 10 नवंबर बुधवार को 8:26 से 11 नवंबर गुरुवार को सुबह 6:50 तक रहेगा
11 नवंबर गुरुवार को चतुर्थी एवं अंतिम संयम के अंतर्गत प्रात:काल उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देकर छठ व्रत का पारण किया जाएगा।