काशी के मंदिर से निकलने वाले फूल माला (निर्माल्य)से तैयार अगरबत्ती व धूप की सुगंध पूर्वांचल के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में भी पहुंचेगी। ऐसा मुमकिन होगा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए वोकल फॉर लोकल के मंत्र को आत्मसात करने से। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पाद की नए सिरे से ब्रांडिंग की तैयारी है। अलग-अलग बिजनेस पोर्टल पर उत्पाद की बिक्री की सुविधा भी इसी कड़ी का हिस्सा है। अकेले बनारस जिले में ही 5000 महिलाएं अलग-अलग स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल रोजगार कर रहीं है। बल्कि देश की आर्थिक तरक्की में भी अपना अहम योगदान दे रही है।
हुनर सीखने संग आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं
कई महिलाएं इन निर्माल्य से बनने वाली अगरबत्तियों, धूप को बनाने का हुनर सीख आत्मनिर्भर भी बन रहीं है। साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट द्वारा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाओं द्वारा तैयार उत्पाद हुनर-ए-बनारस पोर्टल व मोबाइल एप के माध्यम से देश के साथ विदेशों में भी जल्द ही अपनी पहुंच बनाएगा। साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट के निदेशक अजय सिंह का कहना है कि इस परियोजना से न केवल फूलों का उचित प्रयोग होगा, बल्कि महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा।
300 महिलाएं रोजगार पाकर बन रही आत्मनिर्भर
काशी की महिलाएं देसी गाय के गोबर से सुगंधित धूप बत्तियां, गणेश लक्ष्मी की मूर्तियां तैयार करने के साथ गो सेवा भी कर रही हैं। वोकल फॉर लोकल के जरिए ये महिलाएं अपने तैयार उत्पादों को काशी के साथ-साथ सोशल मीडिया के जरिए वाराणसी, लखनऊ, भदोही जैसे अन्य शहरों में भी पहुंच बना रही हैं। इसकी शुरुआत तरना निवासी महिला उद्यमी रीता तिवारी ने लॉकडाउन में अपने घर से की थी। आज उनके साथ आसपास की 300 से ज्यादा महिलाएं इससे जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। जो रोजाना 200 से 300 रुपये कमा लेती हैं।
शहर के कई महिला क्लब दे चुके हैं ऑर्डर
गाय के गोबर से तैयार इको फ्रेंडली उत्पादों को लेने के लिए काशी की कई महिला क्लबों ने ऑर्डर दिए हैं। इसमें धूप स्टिक, धूप कप, गोबर से तैयार गणेश लक्ष्मी, हवन सामग्री आदि उत्पाद शामिल हैं।