बीएचयू स्थित महामना मालवीय गंगा नदी विकास एवं जल प्रबंधन शोध केंद्र के चेयरमैन प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि गंगा का स्वभाव है कि वह अपने बाएं तरफ सिल्ट और दाहिनी तरफ बालू छोड़ आगे बढ़ती हैं। नहर वाला इलाका बालू जमा होने का क्षेत्र है। गंगा पार रेती पर नहर की वस्तुस्थिति का हाल तो बाढ़ का पानी उतरने के बाद ही पता चलेगा।
तभी पता चलेगा कि नहर में कितना प्रतिशत बालू जमा है और कितनी नहर बची हुई है। अगर 10 से 25 फीसदी भी नहर में बालू होगा तो रेती पर नहर के प्रोजेक्ट में बदलाव करना होगा। क्योंकि हर साल नहर की डीसिल्टिंग करने में अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। नहर में अगर बालू का जमाव कम हुआ तो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा सकता है।