चुनावी साल की चुनौतियों के बीच जिले में आपसी खींचतान ने समाजवादी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दिनों सपा कार्यकर्ता नागा यादव पर दर्ज मुकदमे को लेकर जिलाध्यक्ष सतीश फौजी और राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल के बीच खींचतान खुलकर सामने आई। इससे पार्टी की जिले भर में जमकर किरकिरी हुई। अब विधानसभा चुनाव के लिए घोषित प्रत्याशियों को लेकर पार्टी में अंतर्कलह सतह पर है। टिकट की यह रार पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव तक भी पहुंची है। जिस तरह यहां घोषित प्रत्याशियों का विरोध चल रहा है, उसे लेकर खुद पार्टी नेतृत्व भी चिंतित है। इसे प्रत्याशियों में फेरबदल के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग स्थित पार्टी कार्यालय में बुधवार को पहुंचे सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के सामने टिकट को लेकर खींचतान का मसला उठा। छात्रसभा के राष्ट्रीय सचिव आशुतोष सिन्हा ने पार्टी मुखिया से बनारस नगर क्षेत्र की कैंट, शहर उत्तरी और दक्षिणी से घोषित पार्टी प्रत्याशियों के संबंध में पुनर्विचार की गुहार लगाई। 15 मिनट की मुलाकात में सपा प्रमुख ने उनसे यह भी पूछा कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस की आठों विधानसभा सीट पर फतह के लिए तैयारी और कार्ययोजना क्या है। आशुतोष ने उन्हें बताया कि कैंट, शहर उत्तरी और दक्षिणी विधानसभा में पार्टी के लिए खून-पसीना बहाने वाले युवाओं को तरजीह दी जाएगी तो इस बार तीनों सीटें निकल जाएंगी।
बता दें, शिवपुर विधानसभा क्षेत्र से घोषित प्रत्याशी का भी विरोध जारी है। जिले की आठ विधानसभा में रोहनिया, सेवापुरी को छोड़ बाकी छह सीटों पर सपा प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। पार्टी में टिकट बंटवारे पर असंतोष की शिकायतें विभिन्न माध्यमों से शीर्ष नेतृत्व तक लगातार पहुंच रही हैं। माना जा रहा है कि समाजवादी विचारधारा के लोगों, कार्यकर्ताओं की राय, सुझाव और सियासी समीकरण के आधार पर फेरबदल हो सकता है। हालांकि जब आशुतोष से पूछा गया तो उनका कहना था कि नेताजी ने जी-जान से चुनावी तैयारियों में जुटने को कहा है। कहा कि कहीं किसी प्रकार का मतभेद नहीं नजर आना चाहिए। भरोसा दिलाया कि समाधान ऐसा किया जाएगा कि किसी कार्यकर्ता या नेता को कष्ट नहीं होगा।