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Varanasi News: अंग्रेजों ने अंडमान जेल में की ओंगे की हत्या, 672 से घटकर रह गए 135

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गुलामी में अंडमान के सेलुलर जेल बनाने के दौरान अंग्रेजों का ओंगे जनजातियों की हत्या करना और आजकल के पर्यावरणीय दबावों ने काफी नुकसान किया है। ओंगे की आबादी 1901 में 672 थी अब यह घटकर केवल 135 ही रह गई है। हाल ही में एक नवजात शिशु के जन्म से यह संख्या 136 तक हुई।
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बाहरी संपर्क, बीमारियां और वनों की कटाई जैसे खतरे उन्हें विलुप्ति की कगार पर ले जा रहे हैं। ये बातें बीएचयू में हैदराबाद के जेनेटिक विशेषज्ञ डॉ. कुमारस्वामी थंगराज ने कही। सीएसआईआर सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के डॉ. थंगराज ने जंतु विज्ञान विभाग में आर्कियोजूलॉजी मल्टी डिसीप्लिनरी कोर्स के छात्रों से संवाद किया। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप की जीनोमिक इतिहास पर चर्चा की। कहा कि 65 हजार वर्ष पहले अफ्रीका से आए इंसान दक्षिण भारत के रास्ते भारत में दाखिल हुए। इनका संबंध ओंगे जनजातियों से है जो कि अंडमान द्वीप समूह के निग्रिटो समुदायों में से एक है। होमो सेपियंस ने अफ्रीकी महाद्वीप छोड़कर एशिया के तटीय क्षेत्रों की ओर पहुंचे। ये आधुनिक गैर-अफ्रीकी आबादी के मूल स्रोत थे।

5020 मीटर ऊंचे कंकाल झील का खोला राज
डॉ. थंगराज ने कहा कि उत्तराखंड के चमोली जिले में 5020 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कंकाल झील में गर्मियों के दौरान बर्फ पिघलने लगती है और सैकड़ों मानव कंकालों से भर जाती है। इस घटना ने दशकों तक वैज्ञानिकों को हैरान किया था। हालिया जीनोमिक अध्ययन ने इसके बारे में खुलासा किया है कि ये यहां पर सभी एक साथ नहीं मरे, बल्कि कम-से-कम तीन अलग-अलग समूह के हैं, जो लगभग 1000 साल के अंतराल में वहां पहुंचे। पहला समूह दक्षिण एशिया से 7वीं–9वीं शताब्दी में आया। इनकी मृत्यु एक ही बार में ओलावृष्टि से हुई। दूसरा समूह 17वीं–20वीं शताब्दी में पूर्वी भूमध्यसागरीय से आया। तीसरा समूह एकल दक्षिण-पूर्व एशियाई व्यक्तियों का था।
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