बीएचयू का सर सुंदरलाल अस्पताल... यहां वाराणसी और आसपास के जिलों के साथ ही बिहार, झारखंड से भी हर दिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने आते हैं। ओपीडी में बहुत से मरीजों को देखने के बाद डॉक्टर उन्हें जांच कराने या फिर वार्ड में ले जाने की सलाह देते हैं। ऐसे में परिजनों को पहले तो स्ट्रेचर, व्हील चेयर के लिए इंतजार करना पड़ता है। जब स्ट्रेचर और व्हील चेयर किसी तरह मिल जाते हैं तो उसे खींचकर एक से दूसरे स्थान पर तीमारदारों को ही ले जाना पड़ता है। गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन लगाने के बाद सिलिंडर भी परिजन ही खींचकर ले जाते हैं। इस तरह की स्थिति तब है जब अस्पताल प्रशासन की ओर से पूरी सुविधा और स्ट्रेचर, व्हील चेयर से मरीज को उचित स्थान पर पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। बुधवार को सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक से लेकर ओपीडी और वार्डों तक ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जानकारी के अभाव में तीमारदार भटकते दिखे।
केस-1
मिर्जापुर से आए एक मरीज के परिजन बुधवार को इमरजेंसी में दिखाने पहुंचे। डॉक्टर ने पुरानी बिल्डिंग में न्यूरोलॉजी विभाग के वार्ड में जाने को कहा। परिजन इमरजेंसी का पर्चा और जांच रिपोर्ट लेकर स्ट्रेचर को खुद ही खींचते हुए वार्ड की तरफ बढ़े। यहां सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे, लेकिन कोई कर्मचारी स्ट्रेचर ले जाते नहीं दिखा।
केस-दो
बिहार निवासी एक बीमार महिला को लेकर उसके घर वाले स्ट्रेचर पर लिटाकर सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के पास बहुत देर तक खड़े रहे। इस आस में कि कोई अस्पताल की ओर से आएगा। जब कोई नहीं आया तो वह खुद ही आगे बढ़ गए। कई बार तो स्ट्रेचर का पहिया ही फंस जा रहा था, जिसे निकालने में परेशानी हुई।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
बीएचयू के पीआरओ डॉ. राजेश सिंह के माध्यम से अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने बताया है कि जो भी मरीज आता हैं, उसे पूरी सुविधा दी जाती है। स्ट्रेचर एवं व्हील चेयर से मरीज को उचित स्थान पर पहुंचाया जाता है।