सुहागिन महिलाओं के लिए पावन उत्सवों में से एक तीज भी है। ऐसा पर्व जब महिलाएं शादी के जोड़े में सोलह शृंगार कर पति की लंबी उम्र और सुख समृद्धि की खातिर व्रत रखती हैं। वैसे तो महिलाओं को हमेशा से ही सजना-संवरना भाता है लेकिन मौका तीज का हो तो सोलह श्रृंगार खास हो जाता है।
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समय के साथ फैशन ने सजने संवरने का अंदाज बदल दिया है। कभी चलन से बाहर हो चुका सोलह शृंगार में शामिल बाजूबंद और कमरबंद फिर से वापस आ चुका है, वह भी आकर्षक रूप में। पाजेब अब एंकलेट बन चुकी है तो कमरबंद वेस्ट बेल्ट के रूप में सोलह श्रृंगार का हिस्सा बन गया है।
फैशन ने साजो शृंगार के इन आभूषणों के कई रूप गढ़े हैं। चाहे हरियाली तीज हो या हरितालिका तीज, या फिर करवाचौथ का मौका, सोलह श्रृंगार की अपनी खास अहमियत है।
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सावन में मनाए जाने वाली हरियाली तीज, जिसे छोटी तीज के नाम से भी जानते हैं, इसे लेकर महिलाएं खासा उत्साहित रहती हैं। 26 जुलाई को हरियाली तीज है। इसकी तैयारियों का रंग मार्केट से लेकर पार्लर तक में देखने को मिल रहा है।
ये होते हैं सोलह श्रृंगार
सावन में सोलह शृंगार सुहागिनों के लिए है खास
- फोटो : अमर उजाला
बिंदी और सिंदूर - सुहागिनों के लिए ये दोनों शृंगार का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कुमकुम से शुरू होकर आज डिजाइनर बिंदी का फैशन है। सिंदूर ने भी अब लिक्विड सिंदूर का रूप ले लिया है।
महावर - महावर जिसे कि अमूमन आलता भी कहते हैं तीज, पर्व और खासतौर पर पूजा के दौरान महिलाएं लगाती हैं। इसके बिना सोलह शृंगार पूरा नहीं होता।
काजल - आंखों का शृंगार काजल से ही पूरा होता है। सुंदरता के लिए आजकल काजल के साथ आइलाइनर, मस्करा का भी फैशन है।
मेहंदी - मेहंदी के बिना शृंगार अधूरा है। मौका तीज का हो तो बगैर मेहंदी के बात नहीं बनती। मेहंदी खास तौर पर सुहागिन का प्रतीक भी है।
फूलों का गजरा - गजरा आजकल फैशन में बिल्कुल भी नहीं है। हां, गहने की जगह जूड़े में फूल लगाना जरूर फैशन बन गया है। इसके अलावा अब गजरे की जगह महिलाएं हेयर एक्सेसरीज का इस्तेमाल कर रही हैं।
मांगटीका - मांगटीका महिलाएं केवल दो वक्त पर पहनना पसंद करती हैं, एक शादी और दूसरा तीज पर। अब तो फूलों के मांगटीके का भी चलन है।
नथ - बगैर नथ शादी की रस्म पूरी नहीं होती। आजकल बड़े बड़े नथ का फैशन है। तीज व शादी में बड़े नथ पहने जा रहे हैं। पहले के दौर में नोज रिंग यानी बुलाक भी महिलाएं पहनतीं थीं।
कानों के कुंडल - कानों में ईयररिंग यानी कुंडल तो रोज का फैशन है लेकिन शादी के बाद ईयररिंग पहनना जरूरी होता है। कहते हैं शादी के बाद सुहागिन के कान खाली नहीं होने चाहिए।
मंगलसूत्र व हार - मंगलसूत्र तो सुहाग की ही निशानी है और हार शृंगार का अभिन्न अंग। समय समय पर इनके फैशन व ट्रेंड में बदलाव होते रहते हैं।
बाजूबंद - सोलह शृंगार में शामिल बाजूबंद एक तरह से फैशन से बाहर हो चुका था लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह लौटकर आया है। आर्टिफिशियल व डिजाइनर बाजूबंद के साथ अब मेहंदी से बाजूबंद की डिजाइन बनवाई जा रही है।
कमरबंद - कमरबंद का फैशन भी कुछ साल पहले तक बिल्कुल बंद था लेकिन अब ये फिर से वेस्ट बेल्ट के नाम से आया है और इसे न सिर्फ महिलाएं बल्कि युवतियां भी पहन रही हैं।
चूड़ी व कंगन - चूड़ियां सुहाग की प्रतीक मानी गई हैं। हाथों में कड़े से शुरू हुआ, अब शीशों व मेटल की चूड़ियां फैशन में हैं।
अंगूठी - सोलह शृंगार में अंगूठी भी शामिल है। आजकल सोने व डायमंड के साथ आक्सिडाइज्ड व मेटल की अंगूठियां फैशन में हैं।
पायल व बिछिया - पाजेब यानी की पायल और बिछिया में भी समय के साथ बदलाव आया है। ये हमेशा फैशन में रहे, कभी बाहर नहीं हुए।
ब्यूटी एन ज्वॉय ब्यूटी एक्सपर्ट व सेंटर हेड हिमानी जायसवाल कहती हैं- खास मौकों के लिए फेशियल, हेयर कट, मैनीक्योर और पैडीक्योर जैसी ब्यूटी सर्विस महिलाएं लेती ही हैं। तीज वाले दिन पूरे सोलह शृंगार में सुहागिनें इसका भी पूरा ख्याल रखती हैं।
आईपी सिगरा स्थित जावेद हबीब सलोन की सेंटर हेड रचना सिंह कहती हैं- सोलह श्रृंगार के प्रति महिलाओं में जबर्दस्त क्रेज है। खासतौर पर सावन में हो रहे खास आयोजनों के लिए सलोन में महिलाएं आ रही हैं। सोलह श्रृंगार में परंपरागत और आधुनिक फैशन का मेल दिख रहा है।