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Varanasi News: शिक्षक तय करते हैं राष्ट्र के भविष्य की दिशा और दशा

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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शिक्षक संवाद में मंचासीन अतिथि। स्रोत बीएचयू
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बीएचयू के शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में शुक्रवार को आयोजित शिक्षक संवाद में राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका और बदलते दौर में शिक्षा के स्वरूप पर विमर्श हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य मनमोहन वैद्य ने कहा कि राष्ट्र के भविष्य की दिशा और दशा तय करने में शिक्षक की भूमिका अतुलनीय और निर्णायक है।
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उन्होंने भारतीय संस्कृति की महानता और व्यापकता के साथ उसके मूल्यों की प्रधानता को रेखांकित किया। भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में शिक्षकों की भूमिका बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे यहां शिक्षक दाता की भूमिका में हैं, क्योंकि वे विद्यार्थियों को ज्ञान देते हैं और उन्हें सही दिशा की ओर अग्रसर करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक बगीचा है और देशवासी उसके पौधे हैं। पौधों के पल्लवित होने से बगीचा भी सुंदर और समृद्ध होगा। राष्ट्र के भविष्य की दिशा और दशा सुनिश्चित करने में शिक्षक की भूमिका अतुलनीय है और यह भूमिका सदैव व्यापक एवं निर्णायक रही है।
बीएचयू कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि हम सभी अपनी संस्कृति और इतिहास का अध्ययन करें और इस विषय में अपना ज्ञानवर्धन करें। अपने मूल, पहचान और सांस्कृतिक विरासत से भली-भांति अवगत होना जरूरी है।
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पर्यटन प्रबंधन केंद्र के डॉ. अनिल सिंह ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बदलती तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया के दौर में शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इस दौरान आरएसएस काशी प्रांत के प्रांत प्रचारक रमेश, प्रो. दुर्ग सिंह चौहान, विभाग संघ चालक प्रो. जय प्रकाश लाल और नगर संघ चालक डॉ. सुनील मंच पर मौजूद रहे। संचालन डॉ. सत्यप्रकाश पॉल और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अतुल ने किया।
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