यह काढ़ा महामारी में मरहम का काम कर रहा है। विजय ने अपनी दुकान पर 10 रुपये का रेट बोर्ड लगा रखा है। काढ़ा लेने और पीने आए ग्राहकों के पास पैसा नहीं होने पर वह काढ़ा लोगों को निःशुल्क भी पिलाते हैं। ज्यादातर लोग अपनी खुशी से पैसे दे देते हैं। विजय समाजसेवा के साथ अपने परिवार का आजीविका भी चला रहे हैं।
पूरे देश में खोलेंगे काढ़ा ब्रांच
विजय बताते हैं कि लोगों की सेवा करके वह बहुत संतुष्ट हैं, और मौका मिला तो सिर्फ बनारस और यूपी ही नहीं बल्कि पूरे इंडिया को अपना बनारसी काढ़ा पिलाएंगे। काढ़ा पीने आए संतोष चक्रवर्ती बताते हैं कि कोरोना काल में उन्होंने चाय के जगह काढ़ा पीना शुरू कर दिया है। वह और लोगों से भी कहते हैं कि सभी लोग चाय की जगह काढ़ा पिएं।
इन आयुर्वेद मसालों से बनता है काढ़ा
विजय ने अपने आयुर्वेदिक काढ़े में 16 मसालों को शामिल किया है, जिसमें तुलसी, अश्वगंधा, मुलेठी, गिलोय, दालचीनी, लौंग, काली मिर्च, छोटी इलाइची, सौंठ पाउडर, काला मुनक्का, तेज पत्ता, अजवाइन, पीपर, गुड़ और अर्जुन का छाल है। विजय इस काढ़े को अच्छे से पकाते हैं, ताकि सभी आयुर्वेदिक मसालों के मिश्रण का रस पूरी तरह से काढ़े में मिल जाए।