हाजी बाकर हुसैन के इमामबाड़े से उठने वाला ताजिया का जुलूस नहीं उठाया गया। रवायत को कायम रखते हुए मजलिस का आयोजन हुआ। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए लोग मजलिस में शामिल हुए।
मंगलवार को मजलिस को मौलाना हुसैन मेंहदी हुसैनी मुंबई ने खिताब किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की पूरी जिंदगी इंसानियत के लिए समर्पित थी। यही कारण है कि आज सारी दुनिया में इमाम हुसैन को इज्जत की निगाह से देखा जाता है। इस अवसर पर अंजुमन जादे आफरत ने नौहा मातम किया। देर रात तक जियारत का सिलसिला चलता रहा। हाजी फरमान हैदर ने बताया कि यह जुलूस भेलूपुरा, गौरीगंज, शिवाला, सोनारपुरा आदि क्षेत्रों से होता हुआ शिवाला घाट जाता था लेकिन कोरोना संक्रमण और प्रशासन के निर्देशानुसार जुलूस जहां से उठा वहीं समाप्त हो गया। शहर भर में चेहल्लुम के सिलसिले से मजलिसें जारी हैं। इमाम का 1382वां चेहल्लुम गुरुवार आठ अक्तूबर को मनाया जाएगा।