बुद्ध पूर्णिमा पर तथागत की उपदेश स्थली दीपों की स्वर्णिम आभा से जगमग हो उठी। सोमवार को सारनाथ का कोना-कोना बौद्ध भिक्षुओं की प्रार्थना और श्रद्धा से अभिसिंचित हुआ। पहली बार वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर बौद्ध धर्मावलंबियों ने भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि कलश के दर्शन किए। शाम को धम्म क्षेत्र का पूरा प्रांगण 51 हजार दीपों से रोशन किया गया।
सोमवार को मूलगंध कुटी विहार में भंते आर सुमित्तानंद थेरो, भंते चंद्रीमा और भंते नागवंशा ने अस्थि कलश दर्शन का शुभारंभ किया। आश्रम में श्रद्धालुओं को पवित्र आरती का दर्शन कराया गया। सारनाथ स्थित मठ और बौद्ध मंदिरों में महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में धम्म यात्रा, भोजन दान, दीपदान विधिविधान से संपन्न हुआ। पर्यटन विभाग ने सारनाथ संग्रहालय से लेकर मुख्य चौराहे तक 51 हजार दीपों की सजावट से महापर्व में चार चांद लगा दिया।
निकली धम्म यात्रा
शाम 6.30 बजे आशापुर से धम्म यात्रा निकाली गई। सम्राट अशोक महासंघ, सारनाथ बुद्धिस्ट विकास समिति, सारनाथ बुद्धिस्ट सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में यात्रा आरंभ हुई। सबसे आगे सजे धजे वाहन पर भगवान बुद्ध की ज्ञान मुद्रा में प्रतिमा रखी हुई थी। उसके पीछे अनुयायी और छात्र-छात्राएं हाथों में पंचशील झंडा लेकर चल रहे थे। धम्म यात्रा हवेलिया चौराहे, चौखंडी स्तूप, संग्रहालय होते हुए मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर पहुंची। महेंद्र प्रताप मौर्य, संजय मौर्य, राजेंद्र मानव, डॉ. अरविंद कुमार, नेमचंद्र मौर्य, लक्ष्मण, बालचंद शामिल रहे।
नियाज के दीपों से जगमग हुआ बौद्ध स्थली
वाराणसी। चुनार के मुस्लिम परिवार द्वारा निर्मित 51 हजार दीप को नियाज अहमद खान के परिवार ने तैयार किया था। कोरोना में दो साल मिट्टी के दीप नहीं बनाने पर अफसोस जाहिर करते हुए परिवार की साइना खान ने बताया कि 51 हजार दीयों को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा है। संवाद