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काशी-तमिल संगमम का आगाज: नमो घाट पर सीएम योगी, तमिलनाडु के राज्यपाल समेत कई दिग्गजों ने किया उद्घाटन

Tue, 02 Dec 2025 05:48 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि, सीएम योगी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र व डिप्टी सीएम मंगलवार को काशी पहुंचे। सभी अतिथियों ने काशी-तमिल संगमम का शुभारंभ किया। पुडुचेरी के उपराज्यपाल कैलासनाथन, तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री भी शामिल रहे। 
 
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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह यात्रा सदियों पुरानी है। काशी-तमिल संगमम् उसके आधुनिक रूप से हमें जोड़ रहा है। संगमम् ने जन-जन में एक आंदोलन का रूप ले लिया है जहां ज्ञान-विनिमय, आध्यात्मिकता और एकता का संदेश सशक्त रूप से उभरकर सामने आ रहा है।

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वह मंगलवार की शाम नमो घाट पर काशी तमिल संगमम् 4.0 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। संगमम का उद्घाटन मुख्य अतिथि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि, पुडुचेरी के उपराज्यपाल कैलासनाथन, यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने किया। केंद्रीय मंत्री ने शिक्षा मंत्रालय की भाषाई तकनीकी पहल ‘भाषिणी’ का उल्लेख भी किया।

कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की ओर से हिंदी और तमिल भाषाओं में भेजा गया वीडियो संदेश सुनाया गया। इसमें उन्होंने काशी और तमिलनाडु के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों पर कहा कि आगामी 15 दिनों की यह यात्रा ज्ञान, अध्यात्म और कला के आदान-प्रदान का पवित्र उत्सव होगी, जहां वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या की पुनीत धरती पर प्रतिनिधिमंडल अपने अनमोल अनुभवों को साझा करेगा।
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काशी तमिल संगमम- आइए यहां सीखें तमिल-

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तमिल सीखने की पहल प्रेरक : एल मुरुगन
सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री डॉ. एल मुरुगन ने कहा कि इस बार तमिल सीखने के लिए लोगों को प्रेरित करने की जो पहल की गई है, वह युगांतकारी है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस वर्ष काशी तमिल संगमम् का समापन रामेश्वरम में होगा। इससे तमिलनाडु और काशी की आत्मीयता और सुदृढ़ होगी। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने कहा कि यह संगमम् जीवंत आध्यात्मिक संबंधों का उत्सव है, जिसने सांस्कृतिक पुनरुत्थान की नई लहर उत्पन्न की है।

बहुभाषिकता हमारी शक्ति है : कैलाशनाथन
पुडुचेरी के उपराज्यपाल के कैलाशनाथन ने कहा कि तमिल समुदाय के वे लोग जो बर्मा में व्यापार करते थे, वे काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए 25 प्रतिशत दान अर्पित किया करते थे। उन्होंने तमिल श्रद्धालुओं के लिए काशी में बने 125 कमरों के नवीन गेस्ट हाउस की जानकारी देते हुए इसे एक भारत-श्रेष्ठ भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बहुभाषिकता हमारी शक्ति है और हमें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अपनाते हुए भारतीय भाषाओं को सीखने और अपनाने की आवश्यकता है।
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भाषायी ज्ञान-विस्तार को प्रोत्साहन : ब्रजेश
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि काशी तमिल संगमम् केवल सांस्कृतिक संवाद का माध्यम नहीं बल्कि भाषा-शिक्षण के प्रकल्प के रूप में भी नई पहचान बना रहा है। यह प्रधानमंत्री के श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को साकार कर रहा है। इस वर्ष संगमम् का थीम तमिल करकलाम: आओ तमिल सीखें रखा गया है जो न केवल सांस्कृतिक आदान–प्रदान को बल्कि भाषायी ज्ञान-विस्तार को भी प्रोत्साहित करता है।

व्याकरण-ग्रंथ तोलकाप्पियम का 13 भाषाओं में अनुवाद
उद्घाटन सत्र के दौरान तमिल भाषा के प्रतिष्ठित व्याकरण-ग्रंथ तोलकाप्पियम के 13 भाषाओं में अनुवाद का लोकार्पण किया गया। इससे ज्ञान परंपराओं के आदान-प्रदान की नई दिशा स्थापित हुई। इसके बाद भरतनाट्यम प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान श्रममंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल, डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि आदि मौजूद रहे।
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