शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
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द्वारिका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद को दोबारा काशी ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बनाए जाने पर भारत धर्म महामंडल में घमासान चरम पर पहुंच गया है।
महामंडल के जनरल सेक्रेटरी शंभू उपाध्याय ने डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी की बैठक की कार्यवाही को गलत बताते हुए रिपोर्ट हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेज दी। उन्होंने चीफ जस्टिस को भेजे पत्र में कहा है कि 22 सितंबर को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के चयन के लिए दिए गए आदेश का अनुपालन कराने के लिए किसी पीठासीन जज या सेवानिवृत्त जज की नियुक्ति की जाए, ताकि निष्पक्ष तरीके से शंकराचार्य का चयन कराया जा सके।
महामंडल के सभा कक्ष में जनरल सेक्रेटरी प्रो. शंभू उपाध्याय और चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह ने मंत्री सभा की बैठक को अस्तित्व विहीन और कपटपूर्ण बताया। जनरल सेक्रेटरी ने कहा कि इस बैठक के एजेंडे को कुछ लोगों ने नियम के विपरीत आगे बढ़ाया है।
जबकि इसके एजेंडे को पहले ही महामंडल ने अवैध घोषित कर नोटिस जारी कर दिया था। इसके बाद भी जबरिया की गई बैठक मान्य नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि 36 सदस्यीय मंत्री सभा में से जो सदस्य उस बैठक में बुलाए गए थे उसमें दो पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। स्वरूपानंद को शंकराचार्य चुनने वाले धड़े को बहुमत नहीं मिल सका है। इस तरह का कदम उठाने वाले पदाधिकारियों को खामियाजा भुगतना होगा।