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निकाय चुनाव में भाजपा का हाल, फोन करके बुलाए मतदाता तो बूथों पर बढ़ी भीड़

Mon, 27 Nov 2017 01:27 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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मतदाता सूची में गड़बड़ी और मतदान केंद्र बदलने से आई दिक्कत - फोटो : अमर उजाला
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 नगर निकाय चुनाव में भाजपा को जो उम्मीद थी उसके अनुसार मतदान नहीं हुआ। पार्टी के तमाम प्रयास के बाद भी उनके परंपरागत वोटर घरों से अपेक्षा के अनुरूप नहीं निकले। सुबह साढ़े सात बजे से वोटिंग काफी धीमी गति से शुरू हुई। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना था कि दिन चढ़ने के साथ वोटिंग प्रतिशत बढ़ेगा। वोटिंग प्रतिशत बढ़ा लेकिन जिस गति से पार्टी को वोट मिलना चाहिए था उस गति से वोट नहीं मिल सका। 
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तीन बजे तक 33.75 प्रतिशत मतदान की जानकारी मिलने के बाद पार्टी के पदाधिकारियों ने अंदाजा लगाना शुरू कर दिया कि मतदान प्रतिशत 40 से 45 प्रतिशत के बीच होगा। इसके बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को लगाने का काम शुरू किया गया।

फोन करके मतदाताओं को बूथों पर भेजने का काम शुरू हुआ। कुछ वार्डों में इसका असर दिखाई पड़ा। बांसफाटक, सुडि़या, राम प्यारी रस्तोगी इंटर कालेज में शाम चार बजे के बाद अचानक भाजपा के वोटर की भीड़ बढ़ गई।
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पार्टी के शीर्ष नेता मतदाताओं के साइलेंट होने का कारण तलाशने में जुट गए हैं। पार्टी के कुछ पदाधिकारियों का मानना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी और मतदान केंद्र बदलने से भाजपा के वोटर को दिक्कत आई।

इसी वजह से कम मतदान हुआ। लोकसभा और विधानसभा के मुकाबले निकाय चुनाव में लोग कम रुचि लेते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि निकाय चुनाव में मोहल्ले के तीन चार लोग लड़ते हैं। संबंध सभी से होने के चलते लोग मतदान न करके साइलेंट होना ही मुनासिब समझते हैं।
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मंत्री नीलकंठ तिवारी के वोट को अवैध घोषित करने की मांग

मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी युवा कांग्रेस ने चुनाव आयोग से सूबे के मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी के मत को अवैध घोषित करने की मांग की है। प्रदेश प्रवक्ता अमित राय ने कहा कि जब चुनाव आयोग का यह स्पष्ट निर्देश है कि अधिसूचना जारी होने के बाद मतदाता सूची में किसी का भी नाम नहीं जोड़ा जा सकता। बावजूद इसके सत्ता के दबाव में मंत्री का नाम नियम विरुद्ध तरीके से जोड़ा गया।

भाजपा के मंत्री के लिए अलग से नियम क्यों? शहर में हजारों मतदाता वोटरलिस्ट में नाम न होने से अपने मताधिकार से वंचित हो गए। यदि मंत्री के लिए नियम था तो इनके लिए नियम क्यों नहीं था।

मंत्री का नाम नियम विरुद्ध तरीके से किन परिस्थितियों में जोड़ा गया, चुनाव आयोग इसकी जांच करे और मंत्री के मत को अवैध घोषित करे। या फिर जो भी मतदाता सूची में नाम न होने से मतदान से वंचित रह गए हैं, उनके नाम शामिल कराकर उन्हें दोबारा मतदान का मौका दिया जाए। 
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