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अंधेरे कमरों में हो रही पढ़ाई, कैसे होगा नौनिहालों का भविष्य उज्ज्वल

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कहते हैं शिक्षा से ही देश का भविष्य उज्ज्वल होगा, लेकिन देश के भविष्य को उज्ज्वल करने वाले नौनिहाल आज अंधेरे कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। ये हालत हैं जिले के परिषदीय विद्यालयों के, जहां पिछले 20 दिनों से बच्चे विद्यालय का बिजली कनेक्शन कटने से बिना बिजली और पानी के पढ़ाई कर रहे हैं।
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बच्चे उमस भरी गर्मी के बीच अंधेरे में ही पढ़ने को मजबूर हैं। बिजली न रहने से पानी का भी संकट गहरा गया है। इसकी वजह से मध्याह्न भोजन, बनाने, पीने के पानी और शौचालय में पानी के लिए बच्चों को भटकना पड़ रहा है। साथ ही उमस एवं गर्मी के बीच बैठकर पढ़ाई को विवश होना पड़ रहा है। इसका कारण बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बिजली बिल का भुगतान नहीं होना है। विद्युत आपूर्ति नहीं होने से सबमर्सिबल का संचालन भी नहीं हो रहा है। ऐसे में पीने के पानी की समस्या भी बनी हुई है।
चौकाघाट स्थित प्राथमिक विद्यालय घौसाबाद में पांच कमरे हैं, यहां बच्चे अंधेरे कमरों में पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चों के आखों पर ज्यादा जोर न पड़े इसको लेकर विद्यालय के छोटे से बरामदे में डेस्क और बेंच लगाया गया है। प्राथमिक कन्या विद्यालय चौकाघाट प्रथम, प्राथमिक विद्यालय तेलियाबाग, मॉडल इंग्लिश प्राइमरी स्कूल मंडुवाडीह सहित नगर के 45 शहरी प्राथमिक विद्यालयों में अब तक बिजली नहीं आ सकी है।
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तीन साल में एक लाख 69 हजार रुपये बकाया
मलदहिया स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में 2017 में जब बिजली कटी तो उसका बकाया एक लाख नौ हजार था। लेकिन तीन सालों में यह बकाया एक लाख 69 हजार रुपये हो गया है। यह हाल किसी एक विद्यालय का नहीं है, बल्कि जिले में ऐसे कई विद्यालय हैं, जिनका बकाया एक लाख से ज्यादा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के बिल का भुगतान ग्राम पंचायतें करेंगी। शहरी क्षेत्रों के स्कूलों के लिए कंपोजिट फंड से भुगतान कराकर कनेक्शन जोड़ने का प्रार्थना पत्र दिया गया है।
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- राकेश सिंह, बीएसए
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