बीएचयू अस्पताल के न्यूरोलजी ओपीडी में मरीजों को देखते प्रो. वीएन मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में बीते बुधवार को जानलेवा हमले के विरोध में जूनियर रेजिडेंट-सीनियर रेजिडेंट(जेआर-एसआर) की हड़ताल की वजह से ओपीडी व्यवस्था चरमरा गई थी। पांच दिनों से मरीज इधर-उधर भटक रहे थे। मरीज कराहते रहे लेकिन जूनियर डॉक्टरों के साथ ही कई विभागों की ओपीडी में सीनियर डॉक्टर(आईएमएस बीएचयू के शिक्षकों) भी नहीं बैठे। उनके कमरे में ताला बंद रहा। ओपीडी के बाहर मरीज अपने तीमारदारों के साथ डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। पंजीकरण काउंटर और जांच केंद्रों पर भी सन्नाटे जैसा माहौल देखने को मिला।
बीएचयू अस्पताल में धरना देते जूनियर डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
ये है पूरा मामला
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की इमरजेंसी में बुधवार की देर रात दो महिला सहित पांच जूनियर डॉक्टरों को पीट दिया गया। घायल डॉक्टरों का ट्रॉमा सेंटर में प्राथमिक उपचार करके छात्रावास भेजा गया। इससे नाराज जूनियर डॉक्टरों ने हंगामा किया। डॉक्टरों की तरफ से प्रॉक्टोरियल बोर्ड को तहरीर दी गई है। इसमें सरकारी कामकाज में बाधा डालने, मारपीट व तोड़फोड़ की बात लिखी थी।
बीएचयू अस्पताल के सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में बुधवार की देर रात भूतल पर इमरजेंसी डॉक्टर इलाज में लगे थे। इसी बीच लिफ्ट से बीएचयू के कुछ छात्र इमरजेंसी में आए और अपने परिजन का इलाज जल्द कराने का दबाव बनाने लगे। इससे कहासुनी होने लगी। सुरक्षाकर्मियों ने शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। सुरक्षाकर्मियों से भी नोकझोंक होने लगी। आरोप है कि इमरजेंसी में इलाज कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने आपत्ति की और वहां मौजूद युवकों से बाहर जाने को कहा। इससे नाराज युवकों ने उनकी भी पिटाई शुरू कर दी। इससे दो महिला सहित पांचजूनियर डॉक्टर घायल हो गए। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम सभी को ट्रॉमा सेंटर ले गई, जहां इमरजेंसी में उनका इलाज हुआ।