ओवरलोड वाहनों के नाम पर करोड़ों के खेल पर योगी सरकार की सख्ती का असर दिखने लगा है। ओवरलोड ट्रक कई दिनों से चंदौली के नौबतपुर और सोनभद्र समेत विभिन्न जिलों की सीमाओं पर जहां-तहां खड़े हैं। पुलिस और परिवहन अधिकारी अब भी इस इंतजार में हैं कि कब थोड़ी ढील मिले, और मोटी रकम वसूल कर ट्रकों को आगे बढ़ाएं। सूबे के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने आदेश जारी किया है कि हर हाल में ओवरलोडिंग बंद होनी चाहिए। ओवरलोडिंग से सड़कें टूटती हैं, हादसे ज्यादा होते हैं।
दरअसल वाराणसी समेत पूरे सूबे में ओवरलोडिंग के नाम पर करोड़ों का वारा न्यारा होता है। हर जिले के परिवहन अधिकारी और यातायात पुलिस अपना अलग-अलग टोकन चलाते हैं। जिन वाहनों के पास टोकन होता है, उन्हीं को प्रवेश मिलता है। पैसे देकर टोकन जारी किए जाते हैं। नियमत: 10 चक्का ट्रक पर 15 टन से ज्यादा माल नहीं होना चाहिए लेकिन 40 से 50 टन तक माल ढुलाई होती है। 12 चक्के पर ट्रक पर 20 टन से ज्यादा माल नहीं होना चाहिए लेकिन 50 से 60 टन तक माल ढुलाई होती है। सोनभद्र, चंदौली और बिहार से वाराणसी समेत आसपास के जिलों में बालू और गिट्टी सप्लाई होती है। अन्य प्रदेशों के जिलों से कोयला समेत अन्य सामान भी लाए जाते हैं।
सपा और बसपा की सरकार से टोकन लेकर धड़ल्ले से ओवरलोड वाहनों का संचालन होता रहा है। भाजपा सरकार बनने के बाद कायदे कानून का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। पिछले एक पखवारे से ओवरलोडिंग पर सख्ती है। इसके बाद से परिवहन अधिकारियों से लेकर परिवहन माफियाओं में खलबली है। ट्रकों को पास कराने के लिए सत्ताधारी नेताओं से भी संपर्क साधा जा रहा है। ये सख्ती कब तक चलती है ये देखने वाली बात होगी। वहीं एनजीटी के बिहार में अवैध खनन पर रोक लगाने के बाद से ट्रांसपोर्टरों की मुसीबत बढ़ गई है। तीन दिन से बिहार में ट्रकों की लोडिंग नहीं हो रही है।