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अब तक नहीं मिली कॉपी-किताब और ड्रेस की राशि

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वर्तमान सत्र बुधवार खत्म हो जाएगा। वहीं शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों को ड्रेस, कापी-किताब की राशि अब तक नहीं मिली है। वहीं निजी विद्यालयों को शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि भी नहीं मिली है। जिसकी वजह से कई निजी विद्यालय नए सत्र में प्रवेश लेने से कतरा रहे हैं।
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निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत निजी स्कूलों में प्री-नर्सरी व कक्षा एक में सीट के सापेक्ष 25 फीसद मुफ्त दाखिला दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को देने का प्रावधान है। आरटीई के तहत निशुल्क पढ़ाई के अलावा कापी, किताब, ड्रेस के लिए बच्चों के अभिभावकों को प्रतिवर्ष पांच हजार दिए जाते हैं। विद्यालयों को प्रति बच्चा हर महीने 450 रुपये की दर से सलाना 5400 रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति प्रदान की जाती है। आरटीई के तहत वर्तमान सत्र में विभिन्न निजी विद्यालयों में जिले के 7000 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। आरटीई के जिला समन्वयक विमल केशरी ने बताया कि आरटीई के तहत पंजीकृत बच्चों के ड्रेस, किताब-कापी व शुल्क प्रतिपूर्ति की मांग भेजी गई है।
विभाग पर तीन सालों के बकाया का बोझ
जिला समन्वयक ने बताया कि आरटीई के तहत हर साल विभाग हजारों बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाता है। लेकिन पिछले तीन सालों में 30 हजार बच्चों ने निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत दाखिला लिया है। विभाग अभी तक उनकी शुल्क प्रतिपूर्ति व कापी किताब का पैसा नहीं दे सका है। वहीं वर्तमान में नौ माह के हिसाब से कापी-किताब के लिए 15 करोड़ व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए 12 करोड़ की धनराशि का मांग पत्र शासन को भेजा गया है।
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दो तक सत्यापन पांच को निकलेगी लॉटरी
आरटीई के तहत किए गए आवेदनों का सत्यापन अब दो अप्रैल तक होगा। वहीं प्रथम चरण के आवेदनों की लॉटरी पांच अप्रैल को निकाली जाएगी। द्वितीय चरण के लिए अभिभावक छ: अप्रैल से आवेदन कर सकेंगे।
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