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खेल दिवस: वाराणसी में अभाव को नहीं बनने दी तरक्की की बेड़ी, अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमके काशी के एथलीट

Sun, 29 Aug 2021 12:29 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

शिवपाल सिंह (अंतरराष्ट्रीय एथलीट), विशेष भृगुवंशी (अर्जुन अवार्डी), ललित उपाध्याय (ओलंपियन) और पद्मश्री प्रशांति सिंह ने काशी का नाम रोशन किया है। खबर में इनके बारे में जानें...
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ललित उपाध्याय (ओलंपियन) और पद्मश्री प्रशांति सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मैराथन धावकों में शुमार काशी के गुलजारा सिंह, राम सिंह और संजय राय जैसे खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों के दम पर ओलंपिक में देश का नाम रोशन किया है। बनारस में 100 मीटर से लेकर मैराथन दौड़ तक के अभ्यास के लिए मिट्टी और कांक्रीट के ट्रैक तो हैं, लेकिन सिंथेटिक ट्रैक, पोल वॉल्ट और थ्रोविंग के लिए कोई सुविधा नहीं है। बावजूद इसके काशी के एथलीट राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमक रहे हैं। इनसे प्ररित होकर सिगरा, शिवपुर, लालपुर, यूपी कॉलेज, बीएचयू समेत गांवों के खेल मैदानों में सैकड़ों खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं।  

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टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने से चूके पोल वॉल्ट खिलाड़ी शेखर पांडेय ने कहा कि मैंने गंगा किनारे रेत पर फाइबर पोल की बजाए बांस के डंडे से अभ्यास कर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। बनारस में संसाधनों की कमी के कारण खिलाड़ियों को दिल्ली, लखनऊ आदि राज्यों में जाना पड़ता है।

बीएचयू के भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) सेंटर में अभ्यास करने वाली जेवलिन थ्रोवर वर्षा वर्मा और अलका सिंह का कहना है कि ओलंपियन नीरज चोपड़ा और शिवपाल के टोक्यो ओलंपिक में जाने से एथलेटिक्स की कई स्पर्धाओं को नई पहचान मिली है। मगर, बनारस में आधुनिक स्तर के खेल उपकरणों की कमी से खिलाड़ियों को जूझना पड़ता है।

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जेवलिन थ्रोवर शिवपाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
खिलाड़ियों के बेहतर प्रशिक्षण के लिए खेल मैदान और उपकरणों का अभाव है। 2020 में मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काशी में अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण केंद्र नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (एनसीओई) की मांग की थी, जहां खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण के साथ अच्छी खुराक की सुविधा मिल सके।
- प्रशांति सिंह, पद्मश्री

गांव की पगडंडियों पर पसीना बहाने वाले होनहारों की पूर्वांचल में संख्या तो बहुत है, लेकिन जरूरत जितना खेल संसाधन ही नहीं है। मजबूरन खिलाड़ियों को बाहर के प्रदेशों में जाना पड़ता है, जो काफी खर्चीला होता है। अनुभवी कोच और आधुनिक उपकरण मिले तो प्रतिभाएं चमक सकती हैं।
- शिवपाल सिंह, अंतरराष्ट्रीय एथलीट
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- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जिस तरह से टोक्यो ओलंपिक के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया है, उसी तरह आगे भी स्थानीय स्तर पर साई और खेलो इंडिया के तहत खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलती रहीं तो 2024 के पेरिस ओलंपिक में काशी के और होनहार प्रतिभा दिखाएंगे। 
- ललित उपाध्याय, ओलंपियन, लक्ष्मण अवार्डी

शहर के प्रमुख खेल मैदानों से एक दर्जन खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर काशी का मान बढ़ाया है। बीते कुछ वर्षों में खेल को लेकर सरकार की नीतियों में काफी परिवर्तन आया है, जिसका लाभ खिलाड़ियों को मिल रहा है। खिलाड़ियों को खेलो इंडिया सेंटरों में तैयार किया जा रहा है। 
-विशेष भृगुवंशी, अर्जुन अवार्डी  
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