वर्ष 2018-19 में 145, 2019-20 में 272, 2020-21 में 275 और 2021-22 में 383 इंजन बने। सत्र 2022-23 में 450 इंजन बनाने का लक्ष्य मिला था लेकिन इलेक्टि्रक चिप की आपूर्ति न होने से 363 इंजन ही बन पाए थे।
बालासोर में दुर्घटनाग्रस्त कोरोमंडल ट्रेन का इंजन वर्ष 2020 में बरेका ने बनाया था। इलेक्टि्रक इंजन की क्षमता छह हजार अश्व शक्ति की है। उप महाप्रबंधक विजय का दावा है कि इंजन का निर्माण अच्छा था, इसलिए पलटा नहीं। इंजन मालगाड़ी के डिब्बे पर चढ़ गया। अगर इंजन पलटता तो और बड़ा नुकसान हो सकता था। इंजन का वजन ज्यादा होता है। इसके पलटने के बाद आसपास की पटरियों से गुजरने वाली ट्रेनों को ज्यादा नुकसान पहुंचता। ज्यादा बोगियां क्षतिग्रस्त हो सकती थीं। इससे जनहानि बढ़ने का खतरा रहता।
उप महाप्रबंधक के मुताबिक सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए लिंके हॉफमैन बुश (एलएचबी) डिजाइन की बोगियां बनाई जा रही हैं। कोरोमंडल ट्रेन की बोगियां भी एलएचबी थीं। पहले आईसीएफ डिजाइन की बोगियां होती थीं, जो बहुत अच्छी नहीं मानी जाती थीं।