सौभाग्य योग में महिलाओं ने मां लक्ष्मी का दर्शन पूजन करने के साथ ही 16 दिनों के व्रत का संकल्प भी लिया और 16 शब्दों की कथा सुनी। मंदिर के महंत लिंगिया महाराज ने बताया कि सौभाग्य योग में शुरू हुआ सोरहिया मेला भक्तों के सुख और सौभाग्य में बढ़ोत्तरी करेगा। व्रत की पूर्णाहुति छह अक्तूबर को जीवित्पुत्रिका व्रत के साथ होगी।
महालक्ष्मी का दर्शन पूजन और सोरहिया व्रत संकल्प के साथ श्रद्धालुओं ने मेले में माता लक्ष्मी के मुखौटे को पूजन के लिए खरीदा। डलिया में सजी मां लक्ष्मी का मुखौटा घर ले जाकर विराजमान कराने के बाद 16 दिनों के पूजन का श्रीगणेश हुआ। कुछ श्रद्धालु व्रत पूर्ण होने के 16वें दिन माता के मुखौटों का विसर्जन करेंगे तो कुछ श्रद्धालु एक वर्ष के बाद। व्रत रखने वाली स्त्रियों ने मां लक्ष्मी की मूर्ति में धागा लपेटकर पूरे सोलह दिन पूजा का संकल्प लिया और 16 वें दिन जीवित्पुत्रिका के दिन व्रत का समापन करेंगी।