निजी विद्यालयों की मनमानी को लेकर देश भर में जहां रोज अभियान चलाए जा रहे हैं सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अनोखे ढंग से इसका विरोध किया गया।
अभिभावकों के एक संगठन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्कूलों में मनमानी फीस वसूलने और महंगी किताबें बेचने के विरोध में पीएम के संसदीय कार्यालय पर बुट पॉलिश किया।
लोगों ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की है कि विद्यालयों में शिक्षा के व्यवसायीकरण पर रोक लगे।
इधर मनमानी फीस, मान्यता आदि के मामले में सीबीएसई, आईसीएसई विद्यालय प्रबंधन ने डीआईओएस की ओर से मांगे गए शपथ पत्र पर जवाब दे दिया है। इसमें मानक के अनुसार फीस लेने, दुबारा फीस न लेने, बिना मान्यता कक्षाएं न चलाने आदि लिखी है और इसका पालन न करने पर उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
वाराणसी में 110 सीबीएसई और 15 आईसीएसई विद्यालयों में से अब भी कई विद्यालयों के सामने मान्यता, किताबों आदि का बोर्ड नहीं लग सका है।
विद्यालयों की ओर से पास होने के बाद अगली कक्षा में दाखिले के लिए फीस लेने, परिसर से ही कापी, किताब, बेल्ट आदि की बिक्री न होने, मान्यता-एनसीईआरटी की किताबों की जगह दूसरी किताबों के चलाए जाने से अभिभावक परेशान हैं।
सामाजिक संस्थाओं, विद्यार्थी परिषद आदि के विरोध को देखते हुए पूर्वांचल स्कूल एसोसिएशन ने 16 अप्रैल को बैठक कर सीबीएसई, एनसीईआरटी के सभी मानकों का पालन करने, कापी किताब की परिसर से बिक्री न करने आदि का निर्णय लिया था।
बाद में डीआईओएस डॉ. ओपी राय ने 19 अप्रैल को एक पत्र जारी कर प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों से तीन दिन में शपथ पत्र मांगा था, जिसमें अधिकांश ने शपथ पत्र दे दिया है, लेकिन अब भी 25 से 30 प्रतिशत कॉलेज ही बचे रह गए हैं।
इसमें विद्यालय प्रबंधन ने परिसर में व्यवसायिक उपयोग न करने, मान्यता का विवरण देने, शुल्क का विवरण दर्शाया जाना, सुविधा होने पर ही खेलकूद, कंप्यूटर लैब आदि शुल्क लेने, दूसरे विद्यालयों के छात्रों को संबद्ध न करने आदि का शपथ पत्र दिया है।
डीआईओएस ने बताया कि इसके बाद नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।