सिय पिय मिलन विवाह महामहोत्सव के दाैरान माैजूद महिलाएं।
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जब तक भक्त नहीं बने यह जीवन व्यर्थ
देवकीनंद ठाकुर ने कहा कि काशी का रस, ब्रज का आनंद और मिथिला की मिठास का अद्भुत मिलन बाबा विश्वनाथ की नगरी में मामाजी की कृपा से हो रहा है। यह एक अद्भुत संयोग है। भगवान के इस उत्सव में वहीं शामिल हो रहे हैं जिन पर भगवान की साक्षात कृपा है।
वह सिय पिय मिलन महामहोत्सव के अंतर्गत चल रहे सप्ताहव्यापी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा श्रवण करा रहे थे। कथा श्रवण कराते हुए उन्होंने कहा कि बुद्धिमान तो बहुत है लेकिन विवेकी होना ज्यादा महत्वपूर्ण है। विवेक प्रभु के सत्संग से ही जागृत होगा। स्वर्ग के सारे सुख एक तरफ, सत्संग का सुख एक तरफ। भौतिक संपदाएं सुख का नहीं बल्कि दुख का कारण ही बनती हैं। भगवत भक्ति और सत्संग में ही सच्चा सुख है।
रामजानकी मंदिर में मटकोर की रस्म में शामिल लोग।
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मटकोर के साथ शुरू हुआ श्रीसीताराम विवाह महोत्सव
मटकोर की रस्म के साथ ही काशी में श्री सीताराम विवाह महोत्सव आरंभ हो गया। महिलाओं ने मंगल गीत गाकर मटकोर की रस्में निभाईं। गंगा के तट पर महिलाओं ने माता जानकी के विवाह के लिए विशेष पूजन अर्चना की। संत पंजाबी महाराज की प्रेरणा से महामंडलेश्वर राजकुमार दास के निर्देशन में बृहस्पतिवार को अस्सी स्थित श्रीरामजानकी मठ ट्रस्ट में तीन दिवसीय विवाह महोत्सव शुरू हो गया।
श्रीरामजानकी मठ मांगलिक गीतों से गुंजायमान हो उठा। विवाह पंचमी महोत्सव का श्रीगणेश मटकोर से हुआ। उत्सव में नगर की महिलाएं मांगलिक वेशभूषा में मां सीता के साथ आश्रम से निकलकर मंगल गीत गाती हुई गंगा तट पर पहुंची। वहां जानकी के विवाह के लिए गंगा की विशेष पूजन अर्चना की। महिलाएं मंगल गीत गाती हुईं पुन: मठ पहुंची।
रास्ते भर जगह-जगह माता सीता के ऊपर श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया और आरती भी उतारी गई। कार्यक्रम में काशी के संत,महात्मा,बटुक व गणमान्य लोग शामिल रहे। कार्यक्रम मठ के प्रभारी संत रामलोचन दास के नेतृत्व में सविधि संपन्न हुए। छह दिसंबर को भव्य श्रीराम बरात शोभायात्रा निकाली जाएगी।
उधर, श्रीराम विवाह पंचमी महोत्सव पर संकटमोचन मंदिर में छह से 14 दिसंबर तक सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक 111 ब्राह्मणों द्वारा मानस नवाह्न पाठ यज्ञ और शाम पांच बजे से रात दस बजे तक मानस सम्मेलन होगा।