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सिय पिय मिलन महामहोत्सव : काशी वाले बने बराती, मिथिला वाले बने घराती, गूंजे जयकारे; पुष्प वर्षा से हुआ स्वागत

Fri, 06 Dec 2024 02:41 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News : काशी में सिताराम विवाहोत्सव के अवसर पर लोगों ने अपने-अपने तरीके से भावभक्ति दिखाई। पूरा माहाैल मंत्रोच्चार से गूंज उठा था। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्तों का जुटान हो रहा है।
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संस्कृत विश्वविद्यालय में मटकोर के दाैरान माता सीता को हल्दी लगातीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया, चारों दुलहा में बड़का कमाल सखिया..., सखी हे, दुलहा के भरी आखि देख लेहूना, जैसन पहुना हमार... जैसे गीतों से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षांत मंडप गूंज उठा। सीताराम विवाह उत्सव का उल्लास ऐसा था कि श्रद्धालुओं ने खुद को धन्य किया। 

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काशी वाले बरात में गुलाबी पगड़ी पहनकर बराती बने तो मिथिला वाले पीले साफे में घराती बनकर बरातियों के स्वागत में लगे रहे। लगभग एक किलोमीटर लंबी बरात का रास्ते भर काशीवासी फूलों की वर्षा कर स्वागत करते रहे। 

भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न के साथ जब बरात लेकर काशी की सड़कों पर निकले तो लगा समूची मिथिला ही मेहमानों के स्वागत के लिए काशी में उतर आई। सिय पिय मिलन विवाह महामहोत्सव के सातवें दिन प्रभु श्रीराम के विवाह पूर्व निकली चारों भाईयों की बरात की भव्यता ने हर किसी को मिथिला का अहसास कराया। दीक्षांत मंडप में सुबह से ही प्रभु के विवाह की रस्में निभाई जाती रहीं। सबसे पहले चारों भाइयों को हल्दी लगाई गई। उसके बाद मटकोर की रस्म निभाई गई। साथ ही सिया जी को सात बार हल्दी लगाकर रस्म पूरी की गई। 
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शाम छह बजे प्रभु श्रीराम की भव्य बरात निकाली गई। हाथी, घोड़े, बग्घी, पालकी के साथ बैंड बाजे से सजी बारात में सबसे आगे आगे प्रथमेश विनायक, उनके पीछे देवाधिदेव महादेव गौरा के साथ, उनके पीछे भगवान नारायण माता लक्ष्मी के साथ बग्घियों पर विराजमान होकर भगवान की बारात में चल रहे थे। उनके पीछे साधु, संत महात्मा गुरु विश्वामित्र, गुरु वशिष्ठ की अगुवाई में चल रहे थे। 

उनके पीछे राजा दशरथ इंद्र, नारद मुनि के साथ अन्य राजाओं को लिए चारों राजकुमारों की बरात में वाहन पर सवार होकर चल रहे थे। सबसे पीछे के क्रम में चारों के सखा फिर भरत, शत्रुघ्न एवं सबसे आखिरी में भगवान श्रीराम आपने अनुज लखन लाल जी के साथ रथ पर सवार रहे। बरात संस्कृत विश्वविद्यालय से निकलकर लहुराबीर चौराहे से मलदहिया, तेलियाबाग के रास्ते कथा स्थल पहुंचकर समाप्त हुई। 

सिय पिय मिलन विवाह महामहोत्सव के दाैरान माैजूद महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
जब तक भक्त नहीं बने यह जीवन व्यर्थ
देवकीनंद ठाकुर ने कहा कि काशी का रस, ब्रज का आनंद और मिथिला की मिठास का अद्भुत मिलन बाबा विश्वनाथ की नगरी में मामाजी की कृपा से हो रहा है। यह एक अद्भुत संयोग है। भगवान के इस उत्सव में वहीं शामिल हो रहे हैं जिन पर भगवान की साक्षात कृपा है।

वह सिय पिय मिलन महामहोत्सव के अंतर्गत चल रहे सप्ताहव्यापी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा श्रवण करा रहे थे।  कथा श्रवण कराते हुए उन्होंने कहा कि बुद्धिमान तो बहुत है लेकिन विवेकी होना ज्यादा महत्वपूर्ण है। विवेक प्रभु के सत्संग से ही जागृत होगा। स्वर्ग के सारे सुख एक तरफ, सत्संग का सुख एक तरफ। भौतिक संपदाएं सुख का नहीं बल्कि दुख का कारण ही बनती हैं। भगवत भक्ति और सत्संग में ही सच्चा सुख है। 
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रामजानकी मंदिर में मटकोर की रस्म में शामिल लोग। - फोटो : अमर उजाला
मटकोर के साथ शुरू हुआ श्रीसीताराम विवाह महोत्सव
मटकोर की रस्म के साथ ही काशी में श्री सीताराम विवाह महोत्सव आरंभ हो गया। महिलाओं ने मंगल गीत गाकर मटकोर की रस्में निभाईं। गंगा के तट पर महिलाओं ने माता जानकी के विवाह के लिए विशेष पूजन अर्चना की। संत पंजाबी महाराज की प्रेरणा से महामंडलेश्वर राजकुमार दास के निर्देशन में बृहस्पतिवार को अस्सी स्थित श्रीरामजानकी मठ ट्रस्ट में तीन दिवसीय विवाह महोत्सव शुरू हो गया। 

श्रीरामजानकी मठ मांगलिक गीतों से गुंजायमान हो उठा। विवाह पंचमी महोत्सव का श्रीगणेश मटकोर से हुआ। उत्सव में नगर की महिलाएं मांगलिक वेशभूषा में मां सीता के साथ आश्रम से निकलकर मंगल गीत गाती हुई गंगा तट पर पहुंची। वहां जानकी के विवाह के लिए गंगा की विशेष पूजन अर्चना की। महिलाएं मंगल गीत गाती हुईं पुन: मठ पहुंची। 

रास्ते भर जगह-जगह माता सीता के ऊपर श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया और आरती भी उतारी गई। कार्यक्रम में काशी के संत,महात्मा,बटुक व गणमान्य लोग शामिल रहे। कार्यक्रम मठ के प्रभारी संत रामलोचन दास के नेतृत्व में सविधि संपन्न हुए। छह दिसंबर को भव्य श्रीराम बरात शोभायात्रा निकाली जाएगी।

उधर, श्रीराम विवाह पंचमी महोत्सव पर संकटमोचन मंदिर में छह से 14 दिसंबर तक सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक 111 ब्राह्मणों द्वारा मानस नवाह्न पाठ यज्ञ और शाम पांच बजे से रात दस बजे तक मानस सम्मेलन होगा। 
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