नियुक्ति पत्र लेकर सेना मेें नौकरी करने के लिए जबलपुर पहुंचे गाजीपुर के चार युवकों के सपने पर जहां फर्जीवाड़े से टूट गए। इधर इनके परिवार के लोग सेना द्वारा युवकों को पकड़े जाने से सकते में हैं। सामान्य किसान परिवार से जुड़े इन युवकों ने किसी से कर्ज तो खेत बेचकर नौकरी के नाम पर मोटी रकम सेना में भर्ती के लिए दी थी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस नियुक्ति पत्र को लेकर वह जा रहे हैं, वह फर्जी है। ऐसे परिवार के लोग चिंतित और काफी परेशान हैं।
नंदगंज थाना के सौरम गांव निवासी रविंद्र यादव खोवा की बिक्री और खेती कर परिवार का जीविका चलाते हैं। इनके तीन पुत्रों में सबसे छोटे उपेंद्र यादव सेना में भर्ती की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे थे। लेकिन परिजनों को क्या पता था कि जिस बेटे की नौकरी के लिए वे कर्ज लेकर पैसा दे रहे हैं, ठग द्वारा फर्जी नियुक्ति पत्र देकर उनके पुत्र का जीवन बर्बाद कर देगा।
परिवार में सन्नाटा पसरा हुआ। कोई भी कुछ बताने एवं कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। वहीं नारीपचदेवरा निवासी इकलौते पुत्र नितेश यादव को सेना में भर्ती होने के लिए पिता योगेश ने खेत बेचकर रुपये दे दिए थे। नियुक्ति पत्र फर्जी निकलने के बाद उन्हें पुत्र की चिंता सताए जा रही है।
परिजनों ने बताया कि 2019 में सेना में भर्ती होने लिए नितेश वाराणसी गया था। वहां चंदौली के धानापुर थाना के रायपुर निवासी एक व्यक्ति से मुलाकात हुई थी। वे पुत्र की नौकरी के लिए खेत बेचकर पांच लाख रुपये दिए थे। ऐसे में अब परिवार पूरी तरह से सकते में हैं। इधर धनईपुर रसूलपुर निवासी सपन यादव अपने चार भाईयों से सबसे छोटा है। उसके घर की भी माली हालत कुछ ठीक नहीं हैं।
ऐसे में इस तरह के फर्जीवाड़े का पता चलते ही परिजन काफी चिंतित हैं। वहीं दिलदारनगर थाना क्षेत्र के ताजपुर कुर्रा ग्राम प्रधान अफ्तार खां ने बताया कि अब्दुल सलाम खान के दो पुत्रों में सिंकदर खान सबसे बड़ा है। वह गांव में रहकर सेना की भर्ती की तैयारी करता था। वह कैसे जालसाजों के चक्कर में फंस गया और फर्जी नियुक्ति पत्र के आरोप में सेना के शिकंजे में हैं। परिवार के लोग चिंतित होने के साथ पुत्र की कुशल जाने के लिए परेशान हैं।