बीएचयू के स्थापना में सर सुंदरलाल का योगदान अहम था। उन्होंने न केवल महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के साथ विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए होने वाली बैठकों, कार्यक्रमों में सहभागिता की बल्कि इसके लिए अपना आर्थिक सहयोग भी किया था। बीएचयू के संस्थापक कुलपति होने का गौरव भी सर सुंदरलाल अस्पताल के नाम ही है।
1857 में 21 मई को नैनीताल में जन्मे सर सुंदरलाल बीएचयू में 1916 में संस्थापक कुलपति के रूप में नियुक्त हुए। दो साल से अधिक समय तक सेवा के दौरान उन्होंने समाज के विभिन्न लोगों से संपर्क कर बीएचयू को आगे बढ़ाने का काम किया। बीएचयू में संस्थापक कुलपति रहने के साथ ही सर सुंदरलाल का नाम इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी पहले भारतीय कुलपति के रूप में लिया जाता है। उनके बारे में यही कहा जाता है कि वह सांविधानिक तरीकों से स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक भी थे। बीएचयू के चांसलर और हाईकोर्ट से अवकाश प्राप्त न्यायाधीश गिरधर मालवीय का कहना है कि सर सुंदरलाल के बीएचयू के स्थापना में योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने न केवल स्थापना के लिए महामना जी का हर कदम पर सहयोग किया बल्कि आर्थिक रूप से भी सहयोग दिया। उनकी स्मृति में चल रहे बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में आज न केवल वाराणसी पूर्वांचल बल्कि बिहार और मध्य प्रदेश सहित कई जिलों से आने वाले मरीजों की भी सेवा की जा रही है।