यूपी के शीर्ष पांच जिलों में निवेश की स्थिति
- जिला - कुल म्यूचुअल फंड निवेश
- लखनऊ - 49806 करोड़
- कानपुर - 36091 करोड़
- वाराणसी - 15880 करोड़
- आगरा - 15158 करोड़
- मेरठ - 9384 करोड़
पारंपरिक रूप से बचत करने वाला हमारा समाज अब धन सृजन की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। सबसे बेहतरीन बदलाव महिलाओं और युवाओं की सोच में दिख रहा है। बनारस की महिलाएं अब केवल सोने या बैंक एफडी तक सीमित नहीं हैं।
वे ई-केवाईसी और मोबाइल ऐप्स की मदद से बाजार के जोखिमों को समझते हुए मिडकैप और स्मॉलकैप जैसे फंड्स में अनुशासित निवेश कर रही हैं। कुल निवेश में महिलाओं की करीब 37% की हिस्सेदारी बताती है कि वे अब घर के बजट मैनेजमेंट के साथ-साथ परिवार के लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स को भी लीड कर रही हैं। - नंदिता शुक्ला, सीनियर मैनेजर, कोटक महिंद्रा बैंक।
15880 करोड़ के निवेश में 36.85% महिलाओं की हिस्सेदारी
बैंकर नंदिता शुक्ला बताती हैं कि बनारस की महिलाएं अब छोटी राशि से हर महीने निवेश कर रही हैं। वे अपने भविष्य को सुरक्षित बनाना चाहती हैं। वाराणसी के 15880 करोड़ के निवेश में 36.85% यानी 5852 करोड़ का निवेश महिलाएं कर रही हैं। पांच वर्ष पहले तक महिलाएं पैसे को बैंक एफडी, डाकघर योजनाओं या सोने (गोल्ड) में रखना पसंद करती थीं। हालांकि, डिजिटल केवाईसी (ई-केवाईसी) और मोबाइल ऐप्स के आने से अब बनारस की गृहणियां, महिला व्यापारी और कामकाजी महिलाएं सीधे तौर पर इक्विटी और हाइब्रिड म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर रही हैं।
22 से 30 साल के बीच के युवा कर रहे एसआईपी में इंवेस्ट
निवेश एक्सपर्ट प्रशांत अगवाल बताते हैं कि जिले में 22 से 30 वर्ष के बीच के युवा एसआईपी में इंवेस्ट कर रहे हैं। कामकाजी पेशेवर और छात्रों ने छोटी छोटी बचत करके ऑनलाइन एप्प के माध्यम से निवेश किया है। वाराणसी में खुल रहे कुल नए एसआईपी खातों में से 50% से अधिक खाते पूरी तरह डिजिटल मोड में खुल रहे हैं।
पांच साल पहले वाराणसी में औसत एसआईपी टिकट साइज 1000 से 1500 रूपये के बीच हुआ करता था। बाजार की तेजी और वित्तीय जागरूकता के कारण अब औसत एसआईपी निवेश बढ़कर 2500 रूपये से 3000 रूपये प्रति माह तक पहुंच गया है।