प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के गढ़ में रैली कर ताकत दिखाई और विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया। बसपा सुप्रीमो पर तंज कसते हुए कहा कि टिकट बेचने वाले लोग हैं, उनका कोई भरोसा नहीं है। भाजपा के लोगों को राखी बांधने कौन गया था। तीन बार भाजपा की मदद से मुख्यमंत्री कौन बना है। कहा कि बहन जी ने मुझ पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। मैं नार्कों टेस्ट के लिए तैयार हुआ तो बहन जी पीछे हट गईं।
सकलडीहा इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित रैली में शिवपाल ने जहां भाजपा पर हमला बोला, वहीं सपा और बसपा के गठबंधन पर कटाक्ष भी किया। साथ ही पारिवारिक विवाद और सपा से अलग होने के दर्द को इशारों में बयां कर दिया। भाजपा पर झूठे वादों से जनता को छलने वाली पार्टी बताते हुए शिवपाल ने कहा कि जिन लोगों ने नेता जी मुलायम सिंह यादव को गाली दी, सपा को गुंडों वाली पार्टी बताया, आज उन्हीं के साथ सपा अध्यक्ष ने हाथ मिला लिया है।
प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव के बोलने के बाद मंच पर बहुजन मुक्ति मोर्च के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीएल मातंग बोल रहे थे। इसी बीच शिवपाल यादव उठकर चल दिए। जो चर्चा का विषय बना रहा। उपस्थित लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह कैसा गठबंधन है, एक राष्ट्रीय अध्यक्ष बोल रहे हैं तो दूसरे राष्ट्रीय अध्यक्ष चल दिए।
भाजपा को उखाड़ फेंकेंगे : शिवपाल बोले
शिवपाल सिंह यादव
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प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि भाजपा के साथ सपा और बसपा से भी जनता को सतर्क रहने की जरूरत है। भाजपा झूठे वादों के जरिये जनता को ठग रही है। समान विचार धारा वाले दलों के साथ मिलकर भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकेंगे। वह बुधवार को सकलडीहा इंटर कॉलेज में मंडलीय रैली को संबोधित कर रहे थे।
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) और बहुजन मुक्ति पार्टी की संयुक्त रैली में शिवपाल ने कहा कि भाजपा के नारे अच्छे हैं, लेकिन नारा देने वाले अच्छे नहीं हैं। जिन वादों से भाजपा ने चुनाव जीता था, उन्हें आज तक पूरा नहीं किया। भाजपा की सरकार में संविधान को भी खतरा है। हम समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव में मुकाबला करेंगे, ताकि संविधान और जनता को खतरा पहुंचाने वालों को सत्ता में आने से रोका जा सके।
उन्होंने कहा नोटबंदी व जीएसटी ने सबको को बर्बाद कर दिया। इससे आर्थिक गुलामी बढ़ी और एकमुश्त धन लेकर कई उद्योगपति विदेश भाग गए। काला धन तो विदेश से नहीं आया, लेकिन देश से धन अवश्य चला गया। महंगाई और बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। इसे रोकने में केंद्र व प्रदेश सरकार दोनों असफल हैं। नौजवान, गरीब, किसान, अल्पसंख्यक सभी परेशान हैं।