यूं तो चातुर्मास वह समय है जब भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु शनयकाल में जाते हैं जिसके बाद कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी पर पुनः निद्रा से जागते हैं। वहीं, सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है।
कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रखा जाता है और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। इस बार सावन माह की पहली एकादशी (कामिका एकादशी) 31 जुलाई को मनाई जाएगी। काशी के पंचांग के अनुसार कामिका एकादशी पर दोपहर में 3:55 पर शिववास योग बन रहा है।