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लापरवाही की हद: बरसात के बाद भी बनारस में नहीं बनाया गया डेंगू वार्ड, तीन साल से लगातार मिल रहे 450 मरीज

Tue, 30 Jul 2024 02:31 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में बारिश के बाद मच्छरों का आतंक शुरू हो गया, लेकिन हैरान करने वाली बात है कि यहां अस्पतालों में अब तक डेंगू वार्ड नहीं बनाए गए। यह हाल तब है जब तीन साल से लगातार 450 मरीज से अधिक मरीज मिल रहे हैं।
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डेंगू - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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बरसात का मौसम शुरू होते ही मच्छरों का प्रकोप शुरू हो गया है। शहर से लेकर गांव तक मच्छर भी हो गए हैं लेकिन अब तक अस्पतालों में डेंगू वार्ड नहीं बन सका है। यह स्थिति तब है जब पिछले तीन साल से 450 से अधिक मरीज हर साल मिल रहे हैं।

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डेंगू से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग घर के आसपास पानी जमा न होने देने की अपील तो कर रहा है, लेकिन जिस तरह की तैयारियां होनी चाहिए, वो नहीं दिख रहीं। पिछले कई सालों से हर साल मानसून के शुरू होने के बाद ही अस्पतालों में डेंगू वार्ड बनाया जाता है। यहां मच्छरदानी से लेकर ऐसे मरीजों की सुविधा के लिए अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं। अब तक जिले में कहीं भी अलग वार्ड नहीं बन सका है। ऐसे में अगर मरीजों की संख्या अचानक बढ़ती है तो फिर इलाज कैसे होगा, यह बड़ी चुनौती बनी है।
 
अधिकारी बोले-अस्पतालों में 20, सीएचसी पर 10 बेड रहेंगे रिजर्व
जिला मलेरिया अधिकारी एससी पांडेय का कहना है कि डेंगू, मलेरिया से बचाव को लेकर जिला अस्पताल, मंडलीय अस्पताल में 20-20 बेड और सीएचसी पर 10-10 बेड रिजर्व कराए गए हैं। इस साल अब तक केवल डेंगू के 6 मरीज और मलेरिया के 3 मरीज मिले हैं। बरसात के मौसम में केस बढ़ते हैं। ऐसे में मरीजों के सेहत की जांच के साथ ही निगरानी के लिए भी रैपिड रिस्पांस टीम के गठन की कवायद चल रही है। अस्पतालों में अलग डेंगू वार्ड बनाए जाने सहित अन्य प्रक्रियाएं भी अंतिम दौर में हैं।

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हॉटस्पॉट में बुखार वाले मरीजों की होगी जांच, सैंपल लेगी टीम

डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर सहित अन्य संक्रामक रोगों पर नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने विशेष जांच अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत शहरी और ग्रामीण इलाकों में हॉटस्पॉट में बुखार के मरीजों की सेहत की जांच की जाएगी। साथ ही ऐसे मरीजों का सैंपल लेकर उसकी जांच करवाई जाएगी। इसके बाद सातवें दिन फिर उसी जगह पर टीम जाकर सैंपल लेगी। सीएमओ की ओर से शहरी और ग्रामीण इलाके के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। वेक्टर जनित रोगों को लेकर शहरी क्षेत्र में 31 जबकि ग्रामीण इलाकों में 20 हॉटस्पॉट बनाए गए हैं। सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में एक दिन में टीम पांच-पांच इलाकों में जाकर सैंपल लेगी। हर दिन की रिपोर्ट जिला मलेरिया अधिकारी की ओर से तैयार करवाया जाएगा। इन क्षेत्रों में नगर निगम और ग्रामीण इलाके में जिला पंचायती राज विभाग की टीम फॉगिंग, कूड़ा निस्तारण, छिड़काव कराया जाएगा।  
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सीएचसी पर मिलेगी डिजिटल एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, लैप्रोस्कोपी की सुविधा

अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर मरीज निशुल्क डिजिटल एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और लैप्रोस्कोपी करा सकेंगे। जिलाधिकारी एस. राजलिंगम और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) हिमांशु नागपाल की पहल पर 3.06 करोड़ रुपये से मशीनों को खरीदा जा रहा है। जिले में शहरी क्षेत्र में पांच जबकि ग्रामीण इलाकों में नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। यहां आने वाले मरीजों को अब तक डिजिटल एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही थी। सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि सीएचसी पर मशीनों की खरीदारी के लिए केंद्रीय भंडारण निगम लखनऊ के क्षेत्रीय प्रबंधक को मांगपत्र भेजा गया था। सभी मशीनों के लिए तीन करोड़ छह लाख रुपये की धनराशि स्वीकृति हो चुकी है। इसमें 4 लेप्रोस्कोपिक, 5 अल्ट्रासाउंड, 5 डिजिटल एक्सरे और 4 सी आर्म मशीनें खरीदी जाएंगी। इसके लोगों को घर के पास ही जांच की सुविधाएं मिलने लगेंगी।
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