महाशक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी सोमवार से शुरू हो गया है। चतुर्थी तिथि में बढ़ोतरी होने के कारण इस बार नवरात्र 10 दिनों का होगा। महाअष्टमी का व्रत 30 सितंबर को रखा जाएगा। इस बार कलश स्थापना के लिए चार घंटे का अमृत मुहूर्त मिला है। ऐसे में सुबह से मंदिरों से लेकर घरों तक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की जा रही है। माता का आगमन, गमन और तिथि में बढ़ोतरी, सभी शुभदायक हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी ने बताया कि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी 22 सितंबर को कलश स्थापना सुबह छह बजे से की जा रही है। इस बार अभिजित मुहूर्त दिन में 11:33 बजे से 12:23 बजे तक है। कलश स्थापना के लिए अमृत मुहूर्त सुबह छह से आठ बजे तक और सुबह 8:30 बजे से 10:30 बजे तक रहा।
इस बार माता का आगमन हाथी पर हुआ, जिसका फल अधिक वर्षा और माता का गमन मानव के कंधे पर हो रहा। इसका फल अत्यंत लाभकारी व सुखदायक होता है। इस बार माता का आगमन और गमन दोनों अति शुभकारी है। इसके साथ ही आश्विन शुक्ल पक्ष में चतुर्थी तिथि की वृद्धि से यह पक्ष 16 दिनों का है जिससे यह पक्ष भी सुख-समृद्धि और शांति प्रदायक होगा।