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Navratri 2025: महादेव की काशी में शक्ति की आराधना, दुर्गा पूजा की शुरुआत के साथ घुलने लगा बंगाल का रंग

Mon, 22 Sep 2025 09:52 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Navratri 2025: बनारस में आज छह जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजमान होंगी। काशी में दुर्गा पूजा की शुरुआत करने का श्रेय भी बंगाली परिवार को ही जाता है।
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Sharadiya Navratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिव की नगरी में दस दिवसीय शक्ति की आराधना का महापर्व आज से शुरू हो गया है। शहर में छह जगहों पर माता की प्रतिमाएं विराजमान कराई जा रही हैं। दुर्गा पूजा की शुरुआत के साथ ही बनारस में बंगाल का रंग घुलने लगा है। काशी में दुर्गा पूजा की शुरुआत करने का श्रेय भी बंगाली परिवार को ही जाता है। मित्रा परिवार ने ही शारदीय नवरात्र में बनारस को शक्ति की आराधना का मंत्र दिया था।

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22 सितंबर को पूरे प्रदेश की पहली नौ दिवसीय दुर्गा पूजा की शुरूआत 56वें साल टाउनहाॅल में होगी। 55 साल पुरानी सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति की ओर से प्रतिपदा पर माता की प्रतिमा को विराजमान कराया जाएगा। 

इसके साथ ही शारदा विद्या मंदिर गायघाट, श्री श्री दुर्गा समिति नवापुरा, एसबी दुर्गोत्सव समिति सुड़िया, श्री दारानगर दुर्गा पूजा समिति और बड़ा गणेश पर माता की प्रतिमाएं विराजमान होंगी। काशी में बंगाली ड्योढ़ी से शारदीय नवरात्र में दुर्गा पूजा की शुरुआत 251 साल पहले हुई थी। पूरे जिले में 512 से अधिक प्रतिमाएं विराजमान कराई जाती थीं। 
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नवरात्र की प्रतिपदा के अलावा षष्ठी तिथि पर शहर के सभी पूजा पंडालों में माता की प्रतिमाएं विराजमान हो जाएंगी। बंगीय पूजा पंडालों में षष्ठी तिथि पर मूर्तियों के पहुंचने के साथ ही घट स्थापन, बोधन, आमंत्रण व अधिवास के अनुष्ठान कराए जाएंगे।

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कलश स्थापना के लिए चार घंटे का अमृत मुहूर्त

महाशक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी सोमवार से शुरू हो गया है। चतुर्थी तिथि में बढ़ोतरी होने के कारण इस बार नवरात्र 10 दिनों का होगा। महाअष्टमी का व्रत 30 सितंबर को रखा जाएगा। इस बार कलश स्थापना के लिए चार घंटे का अमृत मुहूर्त मिला है। ऐसे में सुबह से मंदिरों से लेकर घरों तक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की जा रही है। माता का आगमन, गमन और तिथि में बढ़ोतरी, सभी शुभदायक हैं। 

ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी ने बताया कि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी 22 सितंबर को कलश स्थापना सुबह छह बजे से की जा रही है। इस बार अभिजित मुहूर्त दिन में 11:33 बजे से 12:23 बजे तक है। कलश स्थापना के लिए अमृत मुहूर्त सुबह छह से आठ बजे तक और सुबह 8:30 बजे से 10:30 बजे तक रहा। 

इस बार माता का आगमन हाथी पर हुआ, जिसका फल अधिक वर्षा और माता का गमन मानव के कंधे पर हो रहा। इसका फल अत्यंत लाभकारी व सुखदायक होता है। इस बार माता का आगमन और गमन दोनों अति शुभकारी है। इसके साथ ही आश्विन शुक्ल पक्ष में चतुर्थी तिथि की वृद्धि से यह पक्ष 16 दिनों का है जिससे यह पक्ष भी सुख-समृद्धि और शांति प्रदायक होगा।
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