वाराणसी में बीएचयू परिसर का खूबसूरत दृश्य।
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बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र की ओर से वैदिक गणित विषयक सात दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार के पहले दिन वक्ताओं ने गणित के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती (गोवर्धनमठ पुरी, ओडिसा) ने कहा कि सभी कालगर्भित कार्यों के साथ ही कालातीत विषयों का उद्गम वेद हैं। वैज्ञानिकों को वैदिक गणित पर शोध करने की जरूरत है, जिससे कि ऐसी कलाओं का विकास हो, जिसका अभी उद्भव नहीं हुआ है।
ऑनलाइन आयोजित वेबिनार में जगदगुरु निश्चलानंद ने कहा कि वेदों में परमात्म तत्व को प्रतिपादित करने के बारे में कहा गया है। इकाई स्थानापन्न अंक ही मूल अंक है। 9 से अवरोहरण गणना करने पर शून्य अंतिम इकाई अंक आता है। बिना किसी मूल अंग के समायोजन के किसी अन्य अंग का निर्माण नहीं हो सकता है।
मुख्य वक्ता वैदिक गणित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के प्रो. कैलाश विश्वकर्मा ने बताया कि अंक गणित, रेखा गणित, बीज गणित के सवालों का हल वैदिक गणित के माध्यम से क्षण भर में किया जा सकता है।
प्रो. विंध्येश्वरी प्रसाद मिश्र ने वैदिक गणित के विविध उपयोग का वर्णन करते हुए उसके दार्शनिक पक्षों की जानकारी दी। वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वेबिनार में 1300 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। धन्यवाद ज्ञापन गणित विभाग के आचार्य प्रो. शशिकांत मिश्रा ने किया।