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तीन चरणों में शाही नाले का काम, दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य

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शहर की सीवरेज व्यवस्था के पुनरुद्धार के लिए शुरू हुए शाही नाले की सफाई का काम पूरा करने के लिए उसे तीन चरणों में बांट दिया गया है। तीनों चरणों की समयसीमा भी तय कर पूरा काम 31 दिसंबर तक काम पूरा करने की योजना बनाई गई है। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद अब नगर विकास विभाग लगातार इस काम की निगरानी कर रहा है।
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सीवेज समस्या से निजात के लिए शाही नाले का काम शहरवासियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। पिछले पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे इस काम को अब पूरा करने के लिए जल निगम ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण विभाग को पूरी कार्ययोजना भेजी है। दरअसल, इस योजना में 945 मीटर लंबाई में सीवर का काम किया जाना है। जल निगम की योजना के अनुसार पहले भाग में लहुराबीर से कबीर मठ तिराहे की ओर 125 मीटर, दूसरा भाग कबीर मठ तिराहे तक 600 मीटर और तीसरा भाग कबीर मठ तिराहे से शाही नाला तक 220 मीटर तय कर दिया गया है।
दूसरे भाग का सीवर काम पूरा हो गया है और लोक निर्माण विभाग से समन्वय कर यहां की सड़क बनवाई जानी है। 125 मीटर के पहले भाग में आरटीएस से जोड़ा जाना है और उसके लिए नवंबर के अंतिम सप्ताह का समय नियत कर दिया गया है। ट्रंक सीवर लाइन को आटीएस से जोड़ने के साथ ही पहले भाग पर सीवर, मैन होल, स्लूस गेट का काम पूरा कर लिया जाएगा। पहले भाग की सड़क को पांच दिसंबर तक पूरा किया जाना है। कबीर मठ चौराहे पर पुरानी 900 मिमी साइज की ओल्ड ब्रिक को 10 दिसंबर तक लिंक किया जाना है। शाही नाला से जुड़े दो कार्य हो रहे हैं। एक उसकी सफाई व जीर्णोद्धार का कार्य है जो वर्ष 2016 से प्रारंभ हुआ है तो दूसरा कार्य कबीरचौरा से चौकाघाट तक नई पाइप लाइन बिछाकर शाही नाले के डायवर्जन का कार्य है। यह कार्य भी वर्ष 2019 में प्रारंभ हुआ है। अब तक दोनों कार्य पूरा नहीं हो सके हैं।
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चेतावनी के बाद भी नहीं चेते अफसर
गंगा का जलस्तर बढ़ने से जीर्णोद्धार व डायवर्जन का शेष कार्य 21 अक्तूबर 2021 को प्रारंभ हुआ। जीर्णोद्धार कार्य जिस गति से चल रहा है उससे कार्य की पूर्णता फरवरी 2022 से पहले संभव नहीं लग रही है, जबकि डायवर्जन कार्य भी दिसंबर 2021 के बाद ही पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। शाही नाले के दोनों कार्य जब प्रारंभ हुए थे तो एक वर्ष में कार्य पूरा कर लेना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मियाद पर मियाद बढ़ती गई। मुख्यमंत्री से लेकर शासन-प्रशासन से जुड़े जिम्मेदार चेतावनी पर चेतावनी देते गए, लेकिन जल निगम को कोई फर्क नहीं पड़ा। इस कार्य को कर रही चेन्नई की कंपनी श्रीराम ईपीसी का भी कहीं पता नहीं चल रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो कंपनी बोरिया-बिस्तर बांधकर निकल चुकी है।
शाही नाले के काम में तेजी लाई गई है और उसे नियत समय पर पूरा कराने के लिए निगरानी कराई जा रही है। जल निगम की कार्ययोजना पर गंगा प्रदूषण इकाई काम कर रही है। - दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त
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