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काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ के पत्र में कई अहम खुलासे, पढ़ें पूरी खबर

Sun, 14 May 2017 06:31 PM IST
amarujala.com- Written by: अनूप ओझा
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amarujala - फोटो : amarujala
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रंगभरी एकादशी पर शिवार्चनम महोत्सव पर रोक लगाने के बाद दो नौकरशाहों के बीच हुए पत्राचार से नया विवाद पैदा हो गया है। दोनों नौकरशाहों के बीच पत्राचार अभी भी चल रहा है।
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से इस बारे में लिखे गए पत्रों में स्पष्ट किया गया है कि शिवार्चनम के लिए तय स्थल ज्ञानवापी मसजिद के दक्षिण-पूर्व का भाग, जहां वीर भद्रेश्वर मंदिर और शृंगार गौरी विराजमान हैं, वहां कभी विवाद नहीं रहा है। दरअसल, इस मामले में अंजुमन इंतजामिया मसाहिज की आपत्ति के बाद एसपी (सुरक्षा) शशिकांत तिवारी ने मंदिर प्रशासन ने उपरोक्त स्थल पर कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए किसी नई परंपरा को जन्म न देने की हिदायत देते हुए आयोजन पर रोक लगा दी थी।
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उन्होंने इस बारे में मंदिर प्रशासन को चिट्ठी लिखने के साथ ही शासन को रेडियोग्राम भी भेज दिया था। इस संदर्भ में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एसएन त्रिपाठी ने एसपी (सुरक्षा) शशिकांत तिवारी को जवाबी पत्र लिखा है।

पत्र में लिखा है- ‘...ज्ञानवापी मसजिद के दक्षिण-पूर्व में स्थित वीर भद्रेश्वर मंदिर और शृंगार गौरी में हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार दिया गया है। वहां न तो किसी तरह का अवैध निर्माण कराकर श्रद्धालुओं के आम रास्ते को बाधित किया जाना चाहिए न तो वहां कोई धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजन कराने के न्यास परिषद के फैसले पर आपत्ति की जानी चाहिए...।’

मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, आईजी, डीआईजी और एसएसपी को भी भेजे गए जवाबी पत्र में उन्होंने अंजुमन इंतजामिया मसाहिज की आपत्ति और एसपी (सुरक्षा) की रोक को अर्थहीन बताया है। लिखा है कि इस परिसर मेें हमेशा यज्ञ, राम कथा, प्रवचन होते रहे हैं।
 
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दावा किया, ज्ञानवापी मसजिद पुराने विश्वनाथ मंदिर-तीर्थ का हिस्सा

सीईओ का पत्र - फोटो : अमर उजाला
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद इस स्थल का सह व्यवस्थापक हो गया है। पत्र में सीईओ ने लिखा है कि ज्ञानवापी मसजिद और उसका परिसर इतिहास के आइने में पुराने काशी विश्वनाथ मंदिर एवं ज्ञानवापी तीर्थ का हिस्सा है।

इसे औरंगजेब के शासनकाल में गिराकर ज्ञानवापी मसजिद का निर्माण कराया गया था। ज्ञानवापी मसजिद के नीचे अभी भी हिंदू धर्म के शिवलिंग और मूर्तियां बताई जाती हैं। इसके अलावा कुछ दिन पहले ज्ञानवापी परिसर में अवैध रूप से टिन शेड के निर्माण को लेकर धार्मिक संस्थाओं की शिकायत के बाद मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने सीईओ के साथ मौका-मुआयना कर निर्माण पर रोक लगा दी थी।

इस पर भी सीईओ ने एसपी (सुरक्षा) को एक अन्य पत्र भेजकर चेताया है कि उस अवैध निर्माण को हटा लें और दर्शनार्थियों के आवागमन के लिए उस मार्ग को सदैव खाली रखना सुनिश्चित करें। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी ने कहा कि लोहे की पाइप से घेरे गए ज्ञानवापी मसजिद के दक्षिण-पूर्व का भाग कभी विवादित नहीं रहा है।

इस स्थल पर सदैव हिंदुओं के धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। इस पर कोई आपत्ति नहीं रही है। वहां प्रतिवर्ष रामरचित मानस सम्मेलन में देश के प्रकांड विद्वानों द्वारा प्रवचन किया जाता है। वहां कोई आयोजन कराने के न्यास परिषद के फैसले पर आपत्ति लगाना और एसपी (सुरक्षा) की ओर से रोक लगाना हास्यास्पद है। इस तरह की आपत्ति से काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद सहमत नहीं है।   पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा) ज्ञानवापी शशिकांत तिवारी ने बताया कि ज्ञानवापी में काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से आयोजन कराने की नई परंपरा रोकी गई थी। वहां मंदिर की ओर से नए आयोजन की शुरुआत से लॉ एंड आर्डर बिगड़ने की आशंका थी।

जिला प्रशासन ने भी कहा था कि नई शुरुआत नहीं होनी चाहिए। इसलिए सीईओ को पत्र भेजकर उसे रोकने के लिए कहा गया था। रही बात ज्ञानवापी में शेड निर्माण की तो वह अस्थायी है। इससे श्रद्धालुओं का आम रास्ता नहीं रुकेगा। जब चाहे, इसे हटाया जा सकता है।

अंजुमन इंतजामिया मसाहिज, ज्ञानवापी के ज्वाइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन ने कहा कि परिसर में नई परंपरा शुरू नहीं होनी चाहिए। इसके पहले कभी वहां मंदिर की ओर से कार्यक्रम नहीं किया गया था। इस मसले पर खुले दिमाग से सोचना पड़ेगा। ज्ञानवापी के एसपी (सुरक्षा) ने जो भी किया, सही किया। इस पर विवाद खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।
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