रंगभरी एकादशी पर शिवार्चनम महोत्सव पर रोक लगाने के बाद दो नौकरशाहों के बीच हुए पत्राचार से नया विवाद पैदा हो गया है। दोनों नौकरशाहों के बीच पत्राचार अभी भी चल रहा है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से इस बारे में लिखे गए पत्रों में स्पष्ट किया गया है कि शिवार्चनम के लिए तय स्थल ज्ञानवापी मसजिद के दक्षिण-पूर्व का भाग, जहां वीर भद्रेश्वर मंदिर और शृंगार गौरी विराजमान हैं, वहां कभी विवाद नहीं रहा है।
दरअसल, इस मामले में अंजुमन इंतजामिया मसाहिज की आपत्ति के बाद एसपी (सुरक्षा) शशिकांत तिवारी ने मंदिर प्रशासन ने उपरोक्त स्थल पर कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए किसी नई परंपरा को जन्म न देने की हिदायत देते हुए आयोजन पर रोक लगा दी थी।
उन्होंने इस बारे में मंदिर प्रशासन को चिट्ठी लिखने के साथ ही शासन को रेडियोग्राम भी भेज दिया था। इस संदर्भ में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एसएन त्रिपाठी ने एसपी (सुरक्षा) शशिकांत तिवारी को जवाबी पत्र लिखा है।
पत्र में लिखा है- ‘...ज्ञानवापी मसजिद के दक्षिण-पूर्व में स्थित वीर भद्रेश्वर मंदिर और शृंगार गौरी में हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार दिया गया है। वहां न तो किसी तरह का अवैध निर्माण कराकर श्रद्धालुओं के आम रास्ते को बाधित किया जाना चाहिए न तो वहां कोई धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजन कराने के न्यास परिषद के फैसले पर आपत्ति की जानी चाहिए...।’
मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, आईजी, डीआईजी और एसएसपी को भी भेजे गए जवाबी पत्र में उन्होंने अंजुमन इंतजामिया मसाहिज की आपत्ति और एसपी (सुरक्षा) की रोक को अर्थहीन बताया है। लिखा है कि इस परिसर मेें हमेशा यज्ञ, राम कथा, प्रवचन होते रहे हैं।