वाराणसी के उमरहा में ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की त्रिवेणी शनिवार से बहेगी। आस्था के इस प्रवाह में गोता लगाने के लिए देश-दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं। स्वर्वेद उत्तरार्ध ज्ञान यज्ञ में दो लाख से अधिक अनुयायियों के पहुंचने का अनुमान है।
शुक्रवार को मंदिर से लगे इलाके में श्रद्धालुओं की भीड़ से मेले जैसा दृश्य नजर आया। निजी वाहनों, बसों और ट्रेनों से श्रद्धालु उमरहा पहुंच रहे हैं। शनिवार सुबह पांच बजे सद्गुरु स्वतंत्र देव महाराज एवं संत प्रवर विज्ञान देव महाराज की मौजूदगी में ऊं अंकित श्वेत ध्वजा फहराकर यज्ञ आरंभ किया जाएगा। 21 हजार कुंडीय महायज्ञ की निगरानी ड्रोन कैमरे से होगी।
महामंदिर धाम परिसर में ज्ञान महायज्ञ में आहुति देने के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा। देश-विदेश से आने वाले अनुयायियों के ठहरने, खाने के मुकम्मल इंतजाम किए गए हैं।
इसके लिए छोटे-छोटे शिविरों का भी निर्माण कराया गया है। इस महाअनुष्ठान में भाग लेने के लिए यूपी, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, प. बंगाल, असोम, महाराष्ट्र समेत कई प्रांतों से श्रद्धालु पहुंचे हैं।
इसके अलावा जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका, सिंगापुर, दुबई, दक्षिण अफ्रीका सहित दुनिया के कई देशों से विहंगम योग के अनुयाइयों का देर रात तक आना लगा हुआ था। श्रद्धालु हाथों में ऊं अंकित श्वेत ध्वजा लिए दिन भर मंदिर परिसर में उद्घोष करते रहे।
विहंगम योग के प्रणेता सद्गुरु सदाफल देव महाराज द्वारा रचित ’स्वर्वेद’ का संगीतमय पाठ परायण किया जा रहा है। स्वर्वेद के बारे में बताते हुए संत प्रवर विज्ञान देव ने कहा कि विहंगम योग का मूल है स्वर्वेद महाग्रंथ। इस ग्रंथ के पढ़ने से हमारे संस्कार शुद्ध होने लगते हैं। चेतना ऊर्ध्वमुखी हो जाती है।