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बलिया खाद्यान्न घोटाले में दो आरोपियों को सात वर्ष की कड़ी कैद

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32 साल पुराने सरकारी खाद्यान्न घोटाले मामले में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अवनीश गौतम की अदालत ने दो आरोपियों त्रिलोकी नाथ सिंह और सतीश चंद्र सिंह को दोषी पाते हुए सात वर्ष की कड़ी कैद व 40-40 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। बलिया कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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एडीजीसी राजीव कुमार सिन्हा के अनुसार आरोपियों सामाजिक वानिकी विभाग के तत्कालीन कर्मी जौनपुर निवासी त्रिलोकी नाथ सिंह और रसड़ा बलिया निवासी सतीश चंद्र सिंह ने लोकसेवक के पद पर रहते हुए सरकारी योजना में पौधरोपण में फर्जी मस्टररोल तैयार कर सरकारी धन के दुर्विनियोग का गंभीर अपराध किया। इन पर वित्तीय वर्ष 1987-88 व 1988-89 में सड़क निर्माण संपर्क मार्ग इंद्रा आवास सुलभ शौचालय के निर्माण मरम्मत और पौधरोपण आदि कार्यों के कराने में श्रमिकों को काम के बदले अनाज देने की योजना में घालमेल किया गया। प्रस्तावित कार्य न कराकर या लक्ष्य से कम कराकर एनआरईपी व आरएलईपी के अंतर्गत शासन की ओर से आवंटित प्राप्त खाद्यान्न गेहूं व चावल के वितरण में गंभीर अनियमितता बरती गई। श्रमिकों को खाद्यान्न न देकर काला बाजार में बेंचकर प्राप्त धन को आपस में बंदर बाट कर लिया गया। मामले में डिप्टी एसपी विजलेंस ने बलिया में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अदालत ने 16 गवाहों के बयान के बाद आरोपियों को दोषी पाया। वहीं, इस मामले में आरोपी तत्कालीन ग्राम प्रधान अवधेश त्रिपाठी के खिलाफ कोई दस्तावेजी साक्ष्य न होने पर मुकदमे से बरी कर दिया। जबकि एक अन्य आरोपी कर्मी रामचन्द्र चौबे की विचारण के दौरान मौत हो गई।
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