असि नदी की सफाई को लेकर रविदास घाट पर मानव शृंखला बनाते लोग।
नाले में तब्दील हो चुकी असि नदी को बचाने के लिए काशी में रविवार को लंबी मानव शृंखला बनाकर संदेश दिया गया। असि संगमेश्वर से कर्दमेश्वर महादेव (कंदवा) तक स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जन प्रतिनिधियों, व्यापारियों, चित्रकारों, साहित्यकारों ने शृंखला बनाई। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के सलाहकार पूर्व पुलिस महानिदेशक आरएन सिंह ने कहा कि असि नदी को बचाने के लिए जन सहयोग और एकजुटता सबसे बड़ी जरूरत है। असि के पुनरुद्धार और संरक्षण के लिए अमर उजाला ने शहर से गांवों तक जागरूकता मुहिम चलाई थी। इसके बाद विभिन्न संस्थाएं और संगठन इस दिशा में आगे आए।
उन्होंने कहा कि काशी की पहचान के रूप में कभी असि कल कल बहा करती थी लेकिन आज वह इतिहास बनने के कगार पर है। इस पवित्र नदी को बचाने के लिए पहल की जानी चाहिए। कंदवा में अभ्युदय संस्था की निदेशक डॉ. शारदा सिंह के नेतृत्व में बच्चों, महिलाओं ने शृंखला बनाई तो संत रविदास घाट पर भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष एमएलसी लक्ष्मण आचार्य, हरेंद्र राय, डॉ. रितू गर्ग, कपींद्र तिवारी समेत तमाम लोगों ने संकल्प लिया। जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने कहा कि वाराणसी की पहचान इस नदी को बचाने के लिए सबको आगे आना होगा। रामयश मिश्र ने कहा कि नदी का जितना भी स्वरूप बचा है उसे साफ -सुथरा कर संरक्षित किया जाना चाहिए। वेंदात कोचिंग सेंटर के निदेशक अजीत मिश्रा, बीएचयू के वरिष्ठ कर्मचारी जयराम मिश्र, चन्नी सेठ, सुबह -ए -बनारस के सुनील शुक्ला, कृष्ण मोहन पांडेय, देवेंद्र मिश्रा, रवि उपाध्याय, उदय प्रताप वर्मा, मनोज गुप्ता, देवेन्द्र गौड़, पार्षद गोविंद शर्मा, आशुतोष पांडेय, प्रेमलता मिश्रा, खुशबू सिंह, हरीश नारायण मिश्रा का सहयोग सराहनीय रहा।