सारनाथ चौराहे पर पाइप लाइन से फूटा फौव्वारा।
जेएनएनयूआरएम (जेनर्म) के तहत हुआ भ्रष्टाचार अब धरती फाड़ के बोल रहा है। इस योजना के तहत वरुणापार में 228 किमी लंबी भूमिगत पाइप लाइन बिछाई गई। करीब पौने दो सौ करोड़ की लागत से आठ साल में बिछाई गई पाइप लाइन का रविवार को परीक्षण हुआ तो काम की गुणवत्ता की पोल खुल गई। पाइप लाइन फट गई और पानी का सोता कई फीट ऊपर तक फूट पड़ा।
बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे वरुणापार के बाशिंदाें को भी इस गर्मी में भी प्यासे रह जाना होगा। उन्हें शुद्ध पानी मुहैया कराने की उम्मीदों पर पाइप लाइन बिछाने में हुए भ्रष्टाचार से पानी फिरता नजर आ रहा है। नई पाइप लाइन की रविवार को टेस्टिंग की गई। पहले ही दिन टेस्टिंग के दौरान चार स्थानों पर पानी का फौव्वारा फूट पड़ा। जल निगम ने सारनाथ रेलवे स्टेशन के समीप बने ओवरहेड टैंक से जैसे ही टेस्टिंग के लिए आपूर्ति शुरू की, सबसे पहले सारनाथ चौराहे पर पानी का सोता कई फीट ऊपर तक उठने लगा। कुछ ही देर में चौराहे पर चारों तरफ पानी भर गया और आवागमन ठप हो गया। फिर सिंहपुर, बरईपुर, खजुहीं में भी ऐसे ही हालात बन गए।
लीकेज की सूचना पर आपूर्ति बंद कर जल निगम की टीम कारणों की जांच में जुटी। बताया गया कि पाइप लाइन की ज्वाइंट्स पर लगे रबर बेल्ट सूख गए हैं। इसके चलते ऐसी दिक्कत हुई है। जानकारों का दावा है कि जगह-जगह फौव्वारा फूटने से पाइप लाइन की गुणवत्ता की पोल खुल गई है। इस गर्मी में भी शायद ही यह पाइप लाइन उपयोग लायक बन पाए। जबकि, तय समय में काम कराया गया होता तो वर्ष 2012 में ही यह पाइप लाइन चालू हो गई होती।