फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गलत नीतियों के कारण संकट में अन्नदाता, किसान-मजदूर नोटबंदी के असर से अब तक उबर नहीं पाए: पी साईंनाथ

Sat, 30 Nov 2019 11:20 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
पी साईंनाथ। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

खेती पर मंडरा रहे संकट ने मध्य वर्ग को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसान जो संकट झेल रहे हैं, वह प्राकृतिक आपदा के कारण नहीं बल्कि गलत सरकारी नीतियों के कारण। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार पी साईंनाथ का। वे शुक्रवार को यहां एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उनका मानना है कि छोटे किसानों और मजदूर नोटबंदी के असर से अब भी नहीं उबर पाए हैं।

विज्ञापन


उन्होंने जीएसटी को भी छोटे दुकानदारों के लिए नुकसानदायक बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय किसान आयोग की रिपोर्ट 14 सालों से फाइलों में धूल फांक रही है। रिपोर्ट पर अमल हो तो किसानों का भला हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार आंकड़ों की बाजीगरी से किसानों की आत्महत्या की दर को कम करना चाहती है। अधिकारी और पुलिस आत्महत्या करने वाले किसान के घर जब पहुंचते हैं तो वह पहला सवाल करते हैं कि पट्टे का कागज दिखाओ। देश में ऐसे कितने किसान हैं, जिनके पास बटाई के कागज हैं? जाहिर है, ऐसे में वह बटाईदार किसान अन्य वाले कालम (किसान नहीं) में दर्ज कर लिया जाता है। आंकड़ों में यह फेरबदल सभी सरकारें करती आ रही हैं।

विज्ञापन

फसल का सही दाम मिले, उत्पादन लागत कम हो 
सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही है और किसानों के खाते में छह हजार रुपये भी दिए जा रहे हैं तो इसका लाभ किसानों को कितना मिलेगा, इस पर पी साईंनाथ का कहना था कि किसानों को छह हजार रुपये देने की बात है तो यह स्थायी समाधान नहीं है। किसानों उनकी फसल का सही दाम मिले, उत्पादन लागत कम हो और कारपोरेट पर सरकार अंकुश लगाए तभी किसानों को लाभ होगा। 

गांवों से भारी संख्या में पलायन
उन्होंने कहा कि कृषि संकट का असर अब मध्य वर्ग तक पहुंच चुका है। एलीट वर्ग अभी इस संकट से अछूता है। खेती पर संकट से गांवों से भारी संख्या में पलायन हुआ है। सरकार ने रोजगार देने की बात कही थी लेकिन आईटी सेक्टर से 60 हजार आईटी पेशेवरों को निकाला गया। सरकार ने कंज्यूमर एक्सपेंडिचर सर्वे, रोजगार के आंकडे़ और नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट पर ही रोक लगा दी है।
विज्ञापन

भूमि अधिग्रहण बिल में बदलाव की जरूरत
किसानों की हालत पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश भर में लैंड एक्यूजिशन एक्ट 2001 में बदलाव की जरूरत है। किसानों को कलेक्टिव एग्रीमेंट के साथ ही सही मुआवजा भी मिलना चाहिए। किसी को जबरदस्ती उसकी जमीन से हटाना गलत है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें