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पापों का त्याग कर आत्मशुद्धि करना ही है प्रायश्चित : प्रखर महाराज

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द्वारिकाधीश मंदिर में 51 दिवसीय लक्षचंडी महायज्ञ का शुभारंभ मंगलवार से होगा। इसके पूर्व सोमवार को शंकुलधारा पोखरा स्थित मंदिर में प्रायश्चित कर्म किया। यजमानों ने केदारघाट पर पंडित सुनील दीक्षित के आचार्यत्व में प्रायश्चित संकल्प के साथ स्नान किया। महामण्लेश्वर स्वामी प्रखर महाराज ने बताया कि जिस प्रकार किसी भी कार्य को करने के लिए नियमों का पालन करना जरूरी होता है। उसी प्रकार यज्ञ से पहले प्रायश्चित करना जरूरी है।
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सोमवार को प्रायश्चित कर्म के तहत खोजवां के शकुलधारा स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में विष्णु पूजन व हवन के बाद पंचगव्य का प्राशन हुआ। प्रखर महाराज ने कहा दैनिक जीवन में किए गए पापों का त्याग कर आत्मशुद्धि को ही प्रायश्चित कहते हैं। शशि भूषण त्रिपाठी ने बताया कि यज्ञ से पहले निकाली जाने वाली कलश यात्रा को प्रशासन की ओर से अनुमति न मिलने पर निरस्त करके कोरोना अवेयरनेश वॉक रूपी जागरूक यात्रा में बदल दिया गया है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है लोगों को कोरोना से सुरक्षा के लिए जागरूक करना है। द्वारिकाधीश मंदिर में 18 जनवरी से 9 मार्च तक प्रखर महाराज के सानिध्य में 51 दिवसीय यज्ञ का आयोजन किया जायेगा। इस अवसर पर प्रखर परोपकर मिशन ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्ण कुमार खेमका, सचिव संजय अग्रवाल, अनिल अग्रवाल मौजूद रहे।
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